कानपुर में हीटस्ट्रोक के 300 मरीज अस्पतालों में पहुंचे:LLR-उर्सला में हीटवेव के लिए 100 बेड रिजर्व; दोपहर 12 से 4 बजे तक घरों से न निकले


कानपुर में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और 44 डिग्री तापमान में अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगी है। सरकारी अस्पतालों में हैलट, उर्सला और कांशीराम में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई है। एलएलआर, उर्सला और कांशीराम अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में हीट स्ट्रोक, बेचैनी, चक्कर, बेहोशी और डिहाइड्रेशन के मरीज बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यदि समय रहते सावधानी नहीं बरती गई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पिछले पांच दिनों में मरीजों की संख्या दो से तीन गुना तक बढ़ी है। बुधवार को एलएलआर अस्पताल की ओपीडी में 300 से ज्यादा मरीज पहुंचे, जबकि इमरजेंसी में हीट स्ट्रोक और हाइपरथर्मिया के कई मरीज भर्ती किए गए। बढ़ती गर्मी को देखते हुए अस्पतालों में विशेष हीट स्ट्रोक वार्ड भी सक्रिय कर दिए गए हैं। एलएलआर अस्पताल में 50 बेड, उर्सला में 20 और कांशीराम अस्पताल में 30 बेड हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए आरक्षित किए गए हैं। धुंधला दिखाइ दे तो डॉक्टरों को दिखाएं मेडिसिन विभाग की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. रिचा गिरी ने बताया कि हीट स्ट्रोक गर्मी से जुड़ी सबसे गंभीर बीमारी है। जब शरीर का तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है और शरीर खुद को सामान्य तापमान पर नहीं ला पाता, तब यह स्थिति पैदा होती है। इसमें मरीज को चक्कर आना, धुंधला दिखाई देना, तेज पसीना आना, सांस फूलना, हृदय गति तेज होना और बेहोशी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में यह किडनी, हृदय और लीवर को भी प्रभावित कर सकती है। डॉक्टरों के अनुसार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर खतरा और बढ़ जाता है। दोपहर के समय तेज धूप में निकलने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। खासकर बुजुर्ग, बच्चे, मजदूर और लंबे समय तक बाहर रहने वाले लोग अधिक जोखिम में हैं। हीटवेव में इन लक्षणों को अनदेखा न करें हीट स्ट्रोक में होने वाली गंभीर स्थित के लक्षण हीटस्ट्रोक से बचाव के लिए ये करें डॉक्टरों ने दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक धूप में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, ओआरएस और तरल पदार्थ लेने, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनने तथा धूप में निकलते समय सिर ढकने को कहा गया है। डॉक्टरों ने कहा कि शरीर में कमजोरी, चक्कर या बेचैनी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, क्योंकि लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।

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