कलकत्ता हाईकोर्ट का आदेश- दोनों पत्नियों में बांटें पेंशन:कर्मचारी ने ग्रेच्युटी में दूसरी पत्नी को नॉमिनी बनाया, इसलिए


कलकत्ता हाईकोर्ट ने मृत केंद्रीय कर्मचारी की पहली पत्नी को फैमिली पेंशन का आधा हिस्सा देने का आदेश दिया है, जबकि दूसरी पत्नी को ग्रेच्युटी देने कहा है। जस्टिस रीतोब्रतो कुमार मित्रा ने यह आदेश पहली पत्नी की याचिका पर दिया। महिला ने अपने पति की फैमिली पेंशन और ग्रेच्युटी दिलाने की मांग की थी। कोर्ट ने अधिकारियों को 6 हफ्ते के भीतर पहली पत्नी को पेंशन का आधा हिस्सा देने को कहा है। कर्मचारी सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड में काम करते थे और 2024 में सेवा के दौरान उनकी मौत हुई थी। कोर्ट के मुताबिक, उनकी दो शादियां थीं और वे मोहम्मडन लॉ के तहत आते थे। पेंशन दोनों पत्नियों में बराबर बांटने का नियम कोर्ट ने कहा कि लागू पेंशन नियमों के मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी की दो पत्नियां हैं तो फैमिली पेंशन दोनों को बराबर हिस्से में दी जानी चाहिए। यह प्रावधान सेंट्रल सिविल सर्विसेज (पेंशन) रूल्स के नियम 50(8)(c) में है। 1 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने कहा, “फैमिली पेंशन का भुगतान संबंधित नियम 50(8)(c) के तहत होगा। इस नियम के मुताबिक, अगर कर्मचारी की एक से ज्यादा पत्नी हैं, तो दो पत्नियों की स्थिति में फैमिली पेंशन दोनों को बराबर हिस्से में दी जाएगी।” कर्मचारी की मौत के बाद पहली पत्नी ने अधिकारियों से फैमिली पेंशन और अपने पति की ग्रेच्युटी देने की मांग की थी। इसके बाद दूसरी पत्नी ने भी फैमिली पेंशन और अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। अधिकारियों ने पहली पत्नी का दावा स्वीकार नहीं किया था। तलाक के प्रमाण-पत्र पर भी विवाद कोर्ट ने कहा कि पहली पत्नी और मृत कर्मचारी का वैवाहिक संबंध बने रहने के दौरान कुछ विवाद थे। रिकॉर्ड में तलाक का एक प्रमाण-पत्र भी रखा गया था। इसी आधार पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी। पहली पत्नी का कहना था कि यह तलाक प्रमाण-पत्र काजी ने जारी किया था। बाद में काजी ने इसे रद्द और अमान्य घोषित कर दिया, क्योंकि उन्हें पता चला कि पहली शादी मृत कर्मचारी और याचिकाकर्ता के बीच स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत हुई थी। कोर्ट ने साफ किया कि उसे यह तय करने की जरूरत नहीं है कि दोनों में से कौन-सी शादी कानूनी रूप से वैध थी। ग्रेच्युटी दूसरी पत्नी को मिलेगी कोर्ट ने कहा कि लागू केंद्रीय सरकारी पेंशन नियमों के तहत कर्मचारी को रिटायरमेंट ग्रेच्युटी का अधिकार होता है। कर्मचारी की मौत के बाद डेथ ग्रेच्युटी दी जाती है। इन नियमों के तहत कर्मचारी किसी व्यक्ति को अपनी मौत के बाद ग्रेच्युटी पाने के लिए नॉमिनी बना सकता है। नियमों में परिवार के किसी सदस्य को नॉमिनेट करने को प्राथमिकता दी गई है। कोर्ट ने पाया कि मृत कर्मचारी ने अपनी दूसरी पत्नी को नॉमिनी बनाया था। इसलिए अधिकारियों को नॉमिनेशन के मुताबिक ग्रेच्युटी दूसरी पत्नी को देने का आदेश दिया गया। दोनों के अनुकंपा नियुक्ति आवेदन पर फैसला होगा अधिकारियों की ओर से वकील प्रमोद कुमार ड्रोलिया और संतोष कुमार पांडेय ने कोर्ट को बताया कि दोनों महिलाओं ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि दूसरी पत्नी का आवेदन अभी विचाराधीन है। कोर्ट ने अधिकारियों को दोनों आवेदनों पर कानून के मुताबिक विचार करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि दोनों में से जो भी महिला कानूनी रूप से पात्र पाई जाएगी, उसे अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। पहली पत्नी की ओर से वकील देबाशीष कर, हुसैन मुस्तफी और रिमी सिल ने पैरवी की। उनका तर्क था कि पहली पत्नी होने के कारण महिला फैमिली पेंशन के आधे हिस्से की हकदार है।

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