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उन्नाव में पश्चिमी बांधों से लगातार छोड़े जा रहे पानी और ऊपरी क्षेत्रों में हो रही बारिश के चलते गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। पिछले करीब 27 घंटे में जलस्तर में 3 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। बढ़ते जलस्तर के कारण गंगा का पानी शुक्लागंज के प्रमुख घाटों तक पहुंच गया है और तटीय इलाकों की ओर फैलने लगा है। हालांकि फिलहाल जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे है, लेकिन प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, रविवार शाम 6 बजे गंगा का जलस्तर 110.910 मीटर था। सोमवार सुबह 8 बजे यह बढ़कर 110.990 मीटर और सुबह 11 बजे 111.020 मीटर पहुंच गया। दोपहर 1 बजे इसमें हल्की गिरावट के बाद जलस्तर 111.000 मीटर दर्ज हुआ, लेकिन शाम 6 बजे फिर बढ़कर 111.030 मीटर हो गया। मंगलवार सुबह 10 बजे यह 111.020 मीटर और बुधवार दोपहर 1 बजे 111.050 मीटर रिकॉर्ड किया गया। इस तरह पिछले 27 घंटों में जलस्तर में कुल 3 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई। चेतावनी बिंदु से 95 सेमी नीचे बह रही गंगा वर्तमान में शुक्लागंज में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 95 सेंटीमीटर नीचे है। यहां खतरे का निशान 113 मीटर निर्धारित है। जलस्तर अभी सुरक्षित सीमा में है, लेकिन लगातार बढ़ते पानी के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। पश्चिमी बांधों से छोड़े जा रहे पानी का असर विशेषज्ञों के अनुसार हरिद्वार, नरौरा और गंगा बैराज समेत पश्चिमी बांधों से छोड़े जा रहे पानी के साथ ऊपरी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश जलस्तर बढ़ने का प्रमुख कारण है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रही और बांधों से पानी का डिस्चार्ज बढ़ा, तो गंगा के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। प्रशासन ने लोगों से बरतने को कहा एहतियात गंगा का पानी शुक्लागंज और आसपास के निचले तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ने लगा है। हालांकि अभी किसी आबादी वाले इलाके में जलभराव की स्थिति नहीं बनी है। प्रशासन ने संबंधित विभागों को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से गंगा किनारे न जाएं, बच्चों को अकेले घाटों पर न भेजें और किसी भी आपात स्थिति की सूचना तत्काल प्रशासन को दें। प्रशासन का कहना है कि जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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उन्नाव में गंगा का जलस्तर 3 सेमी बढ़ा:घाटों तक पहुंचा पानी, पश्चिमी बांधों से डिस्चार्ज और बारिश से बढ़ी चिंता