इविवि कैंपस बवाल में चार नामजद, 20 अज्ञात पर FIR:एबीवीपी ने कहा हमारा कोई लेनादेना नहीं, पुलिस जांच में जुटी


इलाहाबाद विश्विद्यालय में छात्रों के धरने के दौरान दो छात्र संगठनों के बीच हुई मारपीट, बवाल के मामले में चार लोगों को नामजद 15-20 अज्ञात पर एफआईआर हो गई है।
कैंपस में मारपीट पर जख्मी दिशा छात्र संगठन के छात्रों का आरोप है कि एबीवीपी के कार्यर्ताओं ने हमला किया। हालांकि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पदाधिकारी इससे इंकार करते रहे। उनका कहना है कि मारपीट में एबीवीपी का कोई छात्र शामिल नहीं था। एबीवीपी के विश्विद्यालय ईकाई अध्यक्ष हिमांशु पांंडेय ने आरोपों को सिरे से खारिज किया, कहा कि एबीवीपी इसमें शामिल नहीं, न ही हमारा संगठन ऐसी गतिविधियां करता है। उन्होंने कहा कि संगठन का एक भी कार्यकर्ता घटना के समय परिसर में मौजूद नहीं था। आरोप लगाने का उद्देश्य संगठन और उसके नाम की बदनामी करना है। संगठन शांति और नियम-कायदे का पालन करने में विश्वास रखता है। हालांकि कुछ छात्र नेताओं का कहना है कि एफआईआर में जिन्हें नामजद किया गया है वह एबीपीवी के करीबी रहे हैं। जबकि पुलिस भी मारपीट में एबीवीपी छात्रों के शामिल होने की बात से इंकार कर रही है। मामले पर नागरिक समाज मनीष सिन्हा का कहना है कि धरना स्थल पर बड़ी संख्या में विरोधी गुट के लोग मौजूद थे। जबकि सुरक्षा के नाम पर विश्वविद्यालय परिसर में केवल एक पुलिसकर्मी तैनात था। धरने के दौरान तथाकथित एबीवीपी से जुड़े कार्यकर्ताओं के द्वारा प्रदर्शन में व्यवधान डालना शुरू कर दिया। विरोध करने पर मारपीट शुरू हो गई, कुछ छात्र ने डंडे, राड और पैर से प्रशांत नाम के छात्र (दिशा) को जमीन पर गिरा कर घसीटते हुए पीटा और कपड़े तक फाड़ दिए। इस दौरान कई छात्रों को चोटें आईं। आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार का कहना है कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शांतिपूर्वक आंदोलन कर रहे छात्रों पर संघी गुंडों का हमला शर्मनाक है। जिला प्रशासन तत्काल इनके ऊपर मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेजें। उनका आरोप लगाया कि छात्रों से संवाद करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन चरणद्ध तरीके से चीफ प्रॉक्टर और सिक्योरिटी गार्ड्स के संरक्षण में बाहर से असामाजिक तत्वों को बुलवाकर छात्रों पर जानलेवा हमला कराया गया।

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