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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों ने मंगलवार को धरना प्रदर्शन किया। फीस वृद्धि, सीटों में कटौती, जर्जर बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक अनदेखी के खिलाफ छात्रों ने नारेबाजी की। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि 10 जुलाई से लगातार आंदोलनरत हैं, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उल्टा, छात्रों पर निलंबन और मुकदमे दर्ज करवाने जैसे दमनकारी कदम उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रपति को रक्त पत्र आंदोलनरत छात्रों ने राष्ट्रपति को रक्त से लिखा पत्र भेजकर विश्वविद्यालय में चल रही समस्याओं से अवगत कराया है। पत्र में छात्रों ने कुलपति द्वारा विश्वविद्यालय में की जा रही “तानाशाही” का जिक्र करते हुए उन्हें दोबारा कुलपति पद पर नियुक्त न करने की मांग रखी है। छात्र नेताओं का बयान छात्रनेता आशुतोष मौर्य और अनुराग यादव ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि जब तक फीस वृद्धि और सीटों की कटौती को रोका नहीं जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्र भूख हड़ताल पर भी बैठ सकते हैं यदि प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए। छात्र नेताओं ने कहा कि जब तक स्थायी प्रॉक्टर नहीं आ जाते, तब तक वे किसी कार्यवाहक अधिकारी से वार्ता नहीं करेंगे। विधि संकाय की लाइब्रेरी की छत से पानी टपकने, केंद्रीय पुस्तकालय में जलभराव तथा छात्रावासों की सुरक्षा एवं मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी छात्रों में आक्रोश है। धरने में मौजूद छात्र नेता आंदोलन में आशुतोष मौर्य, अनुराग यादव, प्रियांशु विद्रोही, गौरव गोंड, आयुष महात्मा, मंदीप, ऋषि, सचिन, रोशन, दीपांशु, जामी, अंश यादव, अश्वनी मौर्य, ऋषि बाबा आदि छात्र नेता मौजूद रहे। छात्रों की प्रमुख मांगें
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्रों का धरना प्रदर्शन:राष्ट्रपति को खून से लिखा पत्र,फीस वृद्धि-सीट कटौती के खिलाफ की नारेबाजी