आरएमपीयू के निर्माण में लापरवाही पर सीएम योगी सख्त:अलीगढ़ पहुंचे मुख्यमंत्री ने दिए ठेकेदार पर FIR के निर्देश, एक्सईएन भी जांच के घेरे में


​अलीगढ़ के राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय (RMPU) के निर्माण कार्य में चल रही हीलाहवाली और घटिया क्वालिटी को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गुस्सा फूट पड़ा। सोमवार को विवि परिसर का निरीक्षण करने पहुंचे मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में देरी और तकनीकी खामियां मिलने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कार्यदायी संस्था के ठेकेदार के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता इंद्रपाल सिंह के खिलाफ भी विस्तृत जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। ​मुख्यमंत्री ने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि 15 जुलाई तक हर हाल में शेष निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए। ​’सरकारी धन की बर्बादी बर्दाश्त नहीं, 15 जुलाई आखिरी डेडलाइन’ ​कुलपति प्रो. एनबी सिंह और कुलसचिव प्रबुद्ध सिंह के साथ समीक्षा बैठक करने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद पूरे विश्वविद्यालय परिसर का बारीकी से मुआयना किया। लोक निर्माण विभाग और निर्माण एजेंसी के आला अधिकारियों को चेताते हुए सीएम ने कहा कि गुणवत्ता के मानकों से किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी धन की बर्बादी करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। ​अधिशासी अभियंता पर पहले भी गिर चुकी है गाज अधिशासी अभियंता इंद्रपाल सिंह का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले 19 जनवरी 2024 को हुई समीक्षा बैठक में तत्कालीन डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने लिफ्ट का ऑर्डर न होने और कछुआ गति से चल रहे काम पर नाराजगी जताई थी। तब तत्कालीन डीएम ने अधिशासी अभियंता इंद्रपाल सिंह, सहायक अभियंता अरविंद कुमार और एजेंसी के प्रतिनिधियों को बैठक से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। यही नहीं, काम में देरी पर कंपनी पर 1.75 करोड़ रुपए का भारी-भरकम जुर्माना भी ठोका गया था। ​ओडीओपी बनेगा कोर्स का हिस्सा ​समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि आरएमपीयू में अब पारंपरिक डिग्री बांटने के बजाय कॅरिअर की गारंटी पर फोकस होना चाहिए। ​इंडस्ट्री-ओरिएंटेड कोर्स : कुलपति प्रो. नरेंद्र बहादुर सिंह को निर्देश दिए गए कि वे ऐसे स्किल डेवलपमेंट और रोजगारपरक कोर्स शुरू करें, जो छात्रों को सीधे नौकरी या स्वरोजगार से जोड़ें। पाठ्यक्रमों को आधुनिक तकनीकी विकास और उद्योगों की वर्तमान मांग के हिसाब से अपग्रेड किया जाए। ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना को पढ़ाई का हिस्सा बनाया जाए। स्थानीय उद्योगों, पारंपरिक उत्पादों और स्टार्टअप आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए, ताकि युवा नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले उद्यमी बनें। ​70 मिनट की ‘अग्निपरीक्षा’, धड़कती रहीं अफसरों की सांसें ​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह दौरा कोई औपचारिक वीआईपी विजिट नहीं था, बल्कि वह अपने ड्रीम प्रोजेक्ट की हकीकत परखने जमीनी स्तर पर उतरे थे। सोमवार दोपहर 1:42 बजे जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला परिसर में रुका, प्रशासनिक अमले के हाथ-पांव फूल गए। ​सीएम योगी पूरे 70 मिनट तक परिसर में रहे। उन्होंने लाइब्रेरी, शीला गौतम सभागार और प्रशासनिक भवन का गहनता से निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री अचानक लाइब्रेरी की तरफ मुड़ गए। उन्होंने अंदर जाकर छात्रों के सिटिंग प्लान को देखा और किताबों की उपलब्धता की जांच की। ​अधिकारियों ने ली राहत की सांस दोपहर 2:52 बजे जब मुख्यमंत्री का काफिला कलेक्ट्रेट के लिए रवाना हुआ, तब जाकर पीडब्ल्यूडी और विवि प्रशासन के अधिकारियों की सांस में सांस आई। विवि के अधिकारियों ने अनौपचारिक बातचीत में माना कि मुख्यमंत्री की इस कड़ी परीक्षा में वे जैसे-तैसे पास हो गए हैं, लेकिन व्यवस्थाओं को सुधारने की चुनौती अब भी बड़ी है।

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