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आगरा में तेज आंधी और बारिश के बीच मंगलवार को ताजमहल के रॉयल गेट से पच्चीकारी के पत्थर गिरने की घटना सामने आई। राहत की बात यह रही कि उस समय गेट के नीचे कोई पर्यटक मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। मंगलवार दोपहर धूल भरी आंधी के साथ बारिश शुरू हुई। इस दौरान ताजमहल परिसर में मौजूद पर्यटक मुख्य गुंबद और रॉयल गेट के नीचे शरण लेने लगे। तभी रॉयल गेट के ऊपरी हिस्से में लगी मुगलकालीन पच्चीकारी के कुछ पत्थर ढीले होकर नीचे गिर पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पत्थर गिरने की आवाज सुनते ही पर्यटक वहां से हट गए। बताया जा रहा है कि बीते एक सप्ताह से लगातार आंधी, बारिश और ओलावृष्टि हो रही है, जिसके कारण पच्चीकारी के छोटे-छोटे पत्थर दोनों ओर गिरते देखे गए हैं। इस घटना के बाद रॉयल गेट के रखरखाव और संरचना की मजबूती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गौरतलब है कि पिछले 10 साल में इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। 11 अप्रैल 2018 को 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आई आंधी में रॉयल गेट के तीन छोटे गुंबद और कई पत्थर गिर गए थे, जबकि दक्षिणी गेट की एक मीनार भी क्षतिग्रस्त हुई थी। इसके अलावा 2015 और 2024 में भी पत्थर गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हर दिन हजारों की संख्या में देश-विदेश से पर्यटक ताजमहल देखने पहुंचते हैं। ऐसे में बार-बार हो रही इन घटनाओं ने स्मारक की सुरक्षा और संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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आंधी में रॉयल गेट से गिरे पच्चीकारी के पत्थर:बाल-बाल बचे पर्यटक, पिछले 10 सालों में हो चुकी हैं इस तरह की कई घटनाएं