अमरनाथ यात्रा के लिए पंजाब में कड़ी सुरक्षा:सेना-BSF और पुलिस चौकस, पैरामिलिट्री की 9 कंपनियां तैनात; शंभू से लेकर माधोपुर तक अलर्ट


अमरनाथ यात्रा 2026 को सुरक्षित और निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए पंजाब पुलिस, भारतीय सेना, बीएसएफ और सिविल प्रशासन ने मिलकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की है। अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी, जबकि पंजाब और पड़ोसी राज्यों से श्रद्धालुओं का मूवमेंट 1 जुलाई से ही शुरू होने की उम्मीद है। खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस बार सुरक्षा व्यवस्था में सेना, वायुसेना, बीएसएफ और पंजाब पुलिस की स्थानीय तैनाती के साथ केंद्र की ओर से पंजाब को पैरामिलिट्री फोर्स की 9 कंपनियां उपलब्ध कराई गई हैं। इन कंपनियों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात किया जा रहा है, जबकि आने वाले दिनों में अतिरिक्त कंपनियां मिलने की संभावना है। सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक न हो, इसके लिए आधुनिक तकनीक, अत्याधुनिक उपकरण और उन्नत हथियार प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है। वहीं, श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हाईवे पर विभिन्न स्थानों पर लंगर की व्यवस्था भी की जा रही है। एसएसपी और डीआईजी स्तर पर बैठकें लंगर कमेटियों के प्रभारियों के साथ एसएसपी और डीआईजी स्तर पर बैठकें की जा चुकी हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। यात्रियों के ठहरने के लिए सबसे बड़ा और सुव्यवस्थित इंतजाम जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा कठुआ जिले में (लखनपुर/माधोपुर पार करने के बाद) किया गया है। इसके बावजूद, यदि मौसम या किसी अन्य आपात स्थिति के कारण श्रद्धालुओं को पंजाब में रोकना पड़ता है, तो पठानकोट में उनके रहने और खाने के लिए विशेष कंटिंजेंसी प्लान तैयार किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए 3-टियर सुरक्षा चक्र यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर स्थित माधोपुर बॉर्डर पर कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। यात्रियों की सहायता के लिए आधुनिक कमांड सेंटर पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। यहां सीसीटीवी, शेड, शौचालय और वाटर कूलर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 7 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) तैनात की गई हैं। कमांड सेंटर और संवेदनशील इलाकों में पंजाब पुलिस के जवानों के साथ-साथ सीआरपीएफ और बीएसएफ के जवान भी तैनात रहेंगे। शंभू बैरियर से माधोपुर तक कड़ा पहरा पंजाब और जम्मू-कश्मीर पुलिस की ओर से अमरनाथ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को अपील की गई है कि वे अपनी यात्रा एनएच-44 से ही करें। इसके लिए पटियाला के शंभू बैरियर से लेकर माधोपुर नाके तक सुरक्षा एजेंसियों का कड़ा पहरा है।
जालंधर-पठानकोट रोड : जालंधर से पठानकोट रोड की बात करें तो हर टोल प्लाजा पर पुलिस टीमें तैनात हैं। 1 जुलाई यानि कल से हर टोल प्लाजा और विशेष नाकेबंदी पर पुलिस के साथ-साथ पैरामिलिट्री फोर्स तौनात की जाएगी। इनमें मानसर और लदपालवां टोल प्लाजा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है। इसके अलावा, मीरथल नाका और पंजाब-हिमाचल सीमा स्थित चक्की पुल पर भारी डिप्लॉयमेंट रहेगा। जहां चैकिंग के साथ-साथ संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जाएगी।
अमृतसर-पठानकोट रोड : सुरक्षा एजेंसियों के जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस रूट पर 15 से अधिक हाई सिक्योरिटी नाके लगेंगे। हर नाके पर पुलिस के साथ पैरामिलिट्री फोर्स के जवान तैनात रहेंगे। अमृतसर से लेकर पठानकोट गोल चौक तक पूरे रूट को बस पेट्रोलिंग और नाकों से कवर किया गया है। ताकि, असमाजिक तत्वों को रोका जा सके।
डीजीपी लॉ एंड आर्डर प्रवीण कुमार सिन्हा का कहना है कि बठिंडा, खन्ना, पटियाला और बरनाला से लुधियाना के रास्ते पठानकोट के माधोपर तक आने वाले सभी लिंक रोड्स पर भी कड़ा पहरा रहेगा। आसमान से नजर रखेगी एयरफोर्स एयरफोर्स का काम आसमान से पूरे पंजाब पर नजर रखना है। ये रूटीन में भी होता है। लेकिन, इस बार इसका दायरा बढ़ाया जाएगा। केवल कंटोनमेंट एरिया नहीं, बल्कि अपाचे हेलीकॉप्टर से पूरे रूट पर नजर रखने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा, किसी बड़ी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एयरफोर्स को स्ंटैडबाय पर रखा गया है। पठानकोट में हुई इंटर एजेंसी को-ऑर्डिनेशन बैठक अमरनाथ यात्रा को लेकर पठानकोट में बेहद अहम इंटर एजेंसी को-ऑर्डिनेशन बैठक की गई, जिसमें डीजीपी लॉ एंड आर्डर प्रवीण कुमार सिन्हा के नेतृत्व में सुरक्षा और जन-सुविधाओं के रोडमैप को अंतिम रूप दिया गया। इस उच्चस्तरीय बैठक में कोर कमांडर, जीओसी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और जिला प्रशासन के आलाधिकारियों ने शिरकत की। बैठक में सुरक्षा प्लान और यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं पर बारीकी से चर्चा की गई। पहलगाम हमले और अमरनाथ यात्रा का कोई मेल नहीं डीजीपी लॉ एंड आर्डर प्रवीण कुमार सिन्हा ने पहलगाम में हुए पिछले घटनाक्रम का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि वह एक सरप्राइज इंसिडेंट था, जबकि यह एक पूर्व-घोषित और सुनियोजित यात्रा है, जो लगभग डेढ़ से पौने दो महीने चलेगी। इसके लिए हर संभावित खतरे को भांपते हुए कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन की ओर से अमरनाथ यात्रियों के लिए 3 बेहद जरूरी अपील:

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