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अंबेडकरनगर के अकबरपुर स्थित गौहन्ना में जमीन के स्वामित्व और कब्जे को लेकर चल रहे विवाद में राज्य सरकार और अकबरपुर नगर पालिका को जिला अदालत से राहत मिली है। जिला जज चंद्रोदय कुमार की अदालत ने निचली अदालत का वह आदेश निरस्त कर दिया, जिसमें सरकार और नगर पालिका की आपत्तियां खारिज कर दी गई थीं। जिला अदालत ने दोनों की आपत्तियों को बहाल करते हुए नए सिरे से सुनवाई के निर्देश दिए हैं। साथ ही अंतिम निर्णय आने तक विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। 1995 में दाखिल हुआ था मूल वाद मामला गाटा संख्या 614-गा की जमीन से जुड़ा है। देव नारायण और अन्य लोगों ने वर्ष 1995 में इस संबंध में मूल वाद दाखिल किया था। 17 दिसंबर 2021 को मामले में डिक्री पारित हुई। इसके बाद डिक्री के निष्पादन की प्रक्रिया शुरू हुई तो राज्य सरकार और अकबरपुर नगर पालिका ने विवादित जमीन पर स्वतंत्र अधिकार, स्वामित्व और कब्जा होने का दावा करते हुए आपत्तियां दाखिल कीं। निचली अदालत ने दोनों की आपत्तियां इस आधार पर खारिज कर दी थीं कि सरकार और नगर पालिका मूल मुकदमे में पक्षकार नहीं थीं। इस आदेश को दोनों पक्षों ने जिला अदालत में चुनौती दी थी। तीसरे पक्ष के दावे पर भी होगी सुनवाई सुनवाई के दौरान जिला जज ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि डिक्री के निष्पादन की कार्रवाई में तीसरे पक्ष के स्वतंत्र स्वामित्व, अधिकार और कब्जे से जुड़े दावों पर भी सुनवाई की जा सकती है। केवल मूल मुकदमे में पक्षकार नहीं होने के आधार पर किसी की आपत्ति खारिज नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि राजस्व अभिलेख और बाद के प्रशासनिक आदेश अपने आप में स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। जिला अदालत ने सरकार और नगर पालिका की आपत्तियों को बहाल करते हुए निचली अदालत को यथासंभव तीन महीने में सुनवाई पूरी कर निर्णय देने का निर्देश दिया है। तब तक विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखी जाएगी।
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अंबेडकरनगर में जमीन विवाद में सरकार-नगर पालिका को राहत:जिला जज ने निचली अदालत का आदेश निरस्त किया, महीने में सुनवाई के निर्देश