अंतिम पड़ाव पर पहुंची नीला ड्रम केस की सुनवाई:अभियोजन ने खोली हत्या, शव के टुकड़े करने और नीले ड्रम में छिपाने की कड़ी


मेरठ के चर्चित नीला ड्रम केस की सुनवाई अब धीरे-धीरे अपने निर्णायक दौर में पहुंच गई है। मंगलवार को अदालत में अभियोजन पक्ष ने मुकदमे की शुरुआती विवेचना से लेकर नीले ड्रम की बरामदगी और उसमें से सौरभ राजपूत के बॉडी पार्ट मिलने तक की पूरी कार्रवाई को सिलसिलेवार तरीके से रखा। अभियोजन की ओर से एडवोकेट विजय बहादुर ने प्रथम विवेचक कर्मवीर सिंह, जो बाद में सह विवेचक भी रहे, की शुरुआती कार्रवाई के प्रमुख बिंदुओं को अदालत के सामने रखने का काम किया। अभियोजन ने बताया कि मुकदमा कर्मवीर सिंह के हाथ में आने के बाद सबसे पहले वादी के बयान दर्ज किए गए। इसी दौरान मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने साहिल और मुस्कान को साहिल के घर से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद विवेचक ने पूछताछ से संबंधित तस्करा दर्ज किया। अभियोजन के मुताबिक इसी पूछताछ में दोनों ने सौरभ राजपूत की हत्या किए जाने की बात स्वीकार की थी। कबूलनामे पर अभियोजन की अहम दलील
अभियोजन ने कन्फेशन स्टेटमेंट की कानूनी एडमिसिबिलिटी को लेकर भी अदालत के समक्ष अपनी दलील रखी। कोर्ट को समझाया कि सामान्य परिस्थितियों में पुलिस के सामने किया गया कन्फेशन स्टेटमेंट एडमिसेबल नहीं होता, लेकिन यदि उस बयान से किसी अपराध से जुड़ी कोई बरामदगी या तथ्य सामने आता है तो उस हिस्से को साक्ष्य के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है। इसके समर्थन में अभियोजन ने अदालत के समक्ष एक न्यायिक साइटेशन भी पेश किया। अभियोजन का दावा है कि कोर्ट ने इस बिंदु को स्वीकार किया है। नीले ड्रम से बॉडी पार्ट तक पूरी कड़ी
अभियोजन ने इसके बाद अदालत के सामने उस कार्रवाई को विस्तार से समझाया, जिसके जरिए नीले ड्रम की बरामदगी हुई। कोर्ट को बताया गया कि नीला ड्रम किस तरह बरामद किया गया, उसकी कटाई किस प्रकार कराई गई और उसके बाद सौरभ राजपूत के बॉडी पार्ट बरामद किए गए। इस कार्रवाई को अभियोजन ने अपने केस की अहम कड़ी के तौर पर अदालत के समक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान तलाशी में बरामद अन्य सामान का भी उल्लेख हुआ। अभियोजन ने बताया कि पुलिस को बेड के अंदर से दो चादरें भी मिली थीं। इसके अलावा दवा की शीशी कहां से बरामद हुई और विवेचना में उसकी क्या स्थिति रही, इस बारे में भी अदालत को जानकारी दी गई। 20 गवाहों की कहानी अदालत में रख चुका अभियोजन
अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे एडवोकेट विजय बहादुर के मुताबिक अब तक वह अदालत के समक्ष 20 गवाहों से संबंधित पूरे घटनाक्रम और उनकी गवाही के महत्वपूर्ण बिंदुओं को एक्सप्लेन कर चुके हैं। 21वें गवाह की सुनवाई के बाद केवल एक गवाह शेष रह जाएगा। ऐसे में मुकदमे की सुनवाई अब अंतिम चरण की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। 3 सितंबर को जिरह के मुख्य बिंदुओं पर फोकस
मामले में अगली सुनवाई 3 सितंबर को प्रस्तावित है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक उस दिन डिफेंस काउंसिल की ओर से की गई जिरह के प्रमुख बिंदुओं को अदालत के समक्ष विस्तार से समझाया जाएगा। अभियोजन यह स्पष्ट करने की कोशिश करेगा कि बचाव पक्ष की जिरह के बावजूद किन परिस्थितिजन्य और विवेचनात्मक तथ्यों के आधार पर मुकदमा अभियोजन के पक्ष में और दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध साबित होता है।

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