'जीते जी इलाहाबाद' पुस्तक समीक्षा:डॉ धनंजय चोपड़ा बोले- किताब में है पुराने इलाहाबाद की बेबाकी और बौद्धिक साहस की कहानियां

इलाहाबाद की गलियों में साहित्य की लौ जलती रही। जहां हर मोड़ पर किस्से सांस लेते हैं। ममता कालिया की ‘जीते जी इलाहाबाद’ उसी जिंदा शहर को शब्दों का आलम पहनाती है, जो साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजी गई। यह संस्मरण न केवल शहर की बनावट-मजावट उकेरता है, बल्कि हमें सिखाता है कि अपने शहर…

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