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भाजपा में दो बार सांसद रहे धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी छोड़ते ही संगठन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपने इस्तीफे में उन्होंने भाजपा को प्राइवेट कंपनी की तरह चलाने, संगठन में लोकतंत्र खत्म होने, पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और पैसों के दम पर पद बांटने जैसे आरोप लगाए हैं। बरेली में गुटबाजी और कथित कमीशनखोरी को लेकर भी उन्होंने खुलकर नाराजगी जताई है। उनका दावा है कि मौजूदा हालात रहे तो भाजपा बरेली मंडल की 80% सीटें हार सकती है। इस्तीफे में 10 मुद्दे, संगठन से लेकर सरकार तक पर सवाल
धर्मेंद्र कश्यप ने 10 अक्टूबर 2026 को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष को संबोधित इस्तीफे में पार्टी छोड़ने के कई कारण गिनाए हैं। उन्होंने लिखा कि पार्टी में अब लोकतंत्र नहीं बचा है। संगठन के पदाधिकारियों के चयन से लेकर सरकार के कामकाज तक पर उन्होंने सवाल उठाए हैं। उनके आरोपों में पार्टी की अंदरूनी राजनीति, जातीय समीकरण, कथित भ्रष्टाचार और आम लोगों की नाराजगी जैसे मुद्दे शामिल हैं। भाजपा प्राइवेट कंपनी की तरह तानाशाही कर रही
कश्यप ने आरोप लगाया कि भाजपा में तानाशाही का माहौल है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने उनका चुनाव हरवाया था, वे अब भी संगठन में बने हुए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं की शिकायतों पर सुनवाई क्यों नहीं होती। उनके मुताबिक, संगठन के चुनाव नहीं होते और पदाधिकारियों को ऊपर से थोप दिया जाता है। कार्यकर्ता दरी बिछाने के लिए रह गए
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि पार्टी में पुराने कार्यकर्ताओं को किनारे किया जा रहा है। दूसरी पार्टियों से आने वाले नेताओं को महत्व दिया जा रहा है और पैसों व सिफारिश के आधार पर पद बांटे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शीर्ष स्तर के नेता अपने बच्चों को राजनीतिक रूप से स्थापित करने में लगे हैं, जबकि जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका सीमित होकर रह गई है। पिछड़ों और दलितों के सम्मान पर भी उठाए सवाल
कश्यप ने भाजपा पर पिछड़े और दलित वर्गों को पर्याप्त सम्मान नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने पार्टी के पुराने राजनीतिक घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि सामाजिक समीकरणों और कार्यकर्ताओं की अनदेखी का नुकसान भाजपा को पहले भी उठाना पड़ा है। उनके मुताबिक, पार्टी को अपनी राजनीति और संगठन में सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देना चाहिए। बरेली में गुटबाजी और पैसों से संगठन चलाने का आरोप
इस्तीफे में कश्यप ने बरेली जिले की अंदरूनी राजनीति पर सबसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने किसी नेता का नाम लिए बिना आरोप लगाया कि एक सवर्ण नेता ने कमीशन से खूब पैसा कमाया और उसी के दम पर पार्टी को अपने नियंत्रण में ले लिया। उनका दावा है कि पैसों के जरिए सांसदों और विधायकों के खिलाफ गुटबंदी कराई जाती है और संगठन के पदाधिकारियों को प्रभावित किया जाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ अध्यक्षों का मासिक भुगतान तय है। कश्यप के मुताबिक, किसी को 1 लाख तो किसी को 2 लाख रुपए महीने दिए जाने का दावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे पदाधिकारी अपनी पसंद के लोगों को संगठन में जगह देते हैं। बरेली मंडल की 80% सीटें हार सकती है भाजपा
धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में भाजपा बरेली मंडल की 80% सीटें हार सकती है। उन्होंने UGC से जुड़े मुद्दे और राज्यसभा सीट के घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि पार्टी के भीतर ही कुछ बड़े नेता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने में लगे हैं। धर्म के मुद्दे से हर चुनाव नहीं जीता जा सकता
कश्यप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सम्मान करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के अन्य नेता उनकी लोकप्रियता की आड़ में अपना हित साध रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को बार-बार उठाकर चुनाव जीतने की रणनीति हमेशा काम नहीं करेगी। उनके मुताबिक, जनता के असल मुद्दों पर ध्यान देना जरूरी है। थाने से तहसील तक भ्रष्टाचार का आरोप
पूर्व सांसद ने भाजपा सरकार में सरकारी विभागों के कामकाज पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने थानों से लेकर तहसीलों तक भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाया और दावा किया कि विधायक, सांसद और ब्लॉक प्रमुखों का 20% कमीशन तय है। हालांकि, इस्तीफे में इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज नहीं दिया गया है। उन्होंने बरेली नगर निगम के सालाना 1,000 करोड़ रुपए से अधिक के बजट का जिक्र करते हुए विकास कार्यों और खर्च की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि बजट में कथित अनियमितताओं की जांच होनी चाहिए। व्यापारी, कर्मचारी, किसान और नौजवानों की परेशानी का दावा
कश्यप ने अपने इस्तीफे के आखिर में कहा कि भाजपा सरकार में व्यापारी, कर्मचारी, किसान और नौजवान परेशान हैं। उनके मुताबिक, इन वर्गों की समस्याओं और संगठन के भीतर बढ़ती नाराजगी को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इस्तीफे के बाद सपा में जाने का ऐलान
भाजपा से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र कश्यप समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं। उन्होंने अपनी बेटी कीर्ति कश्यप को बिथरी चैनपुर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ाने का ऐलान भी किया है। ऐसे में उनका इस्तीफा सिर्फ पार्टी छोड़ने का फैसला नहीं, बल्कि भाजपा के संगठन, स्थानीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर खुला राजनीतिक हमला भी बन गया है। हालांकि, इस्तीफे में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
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धर्मेंद्र कश्यप ने इस्तीफे में खोली भाजपा की पोल:इस्तीफे में तानाशाही, गुटबाजी-कमीशनखोरी के आरोप, बरेली मंडल की 80% सीटें हारने का दावा