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शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन आज मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप माता चंद्रघंटा की पूजा की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा के मस्तक पर अर्धचंद्र सजा है और उनके हाथ में घंटा है। चंद्रमा शांति का प्रतीक है, जबकि घंटा नाद का प्रतीक माना गया है। औरैया के देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ दिख रही है। पूरे जिले में नवरात्र का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। देवी मां की कथा के अनुसार, देवासुर संग्राम में देवी के घंटा नाद से कई असुर मारे गए थे। मां चंद्रघंटा अपने नाद से शांति का संदेश देती हैं। भक्त विधि-विधान से पूजा कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना कर रहे हैं। मान्यता है कि मां की आराधना से डर दूर होता है और भक्तों को साहस व शक्ति मिलती है। इस उपासना में सिद्धकुंजिका स्तोत्र का पाठ भी शुभ माना गया है। मंदिरों में श्रद्धालु मां के जयकारे लगाकर आस्था जता रहे हैं।
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मां चंद्रघंटा की पूजा,मस्तक पर अर्धचंद्र और हाथ में घंटा:नवरात्र के तीसरे दिन भक्त कर रहे आराधना, सुख-शांति का मिलेगा संदेश