लखनऊ13 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

लखनऊ में गांधी जयंती पर बलरामपुर गार्डन में चल रहे 23वें राष्ट्रीय पुस्तक मेले में युवाओं और पुस्तक प्रेमियों की भीड़ जुटने लगी। ‘वंदे मातरम्’ की थीम पर मेले में नई किताबें पाठकों को आकर्षित कर रही हैं।
प्रभात प्रकाशन के स्टॉल पर पुलिस अधिकारी प्रकाश सिंह की ‘संघर्ष’, हेमंत शर्मा के संपादन में राम बहादुर राय पर आधारित ‘अस्सी के रात साहब’, राजीव रंजन और रचना नायडू की ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’, डॉ. श्रवण सिंह बघेल की ‘चरैवेति’ और पूर्व आईएएस अरविंद कुमार सिंह की ‘साक्षात्कार दर्पण’ पसंद की जा रही हैं।
सांस्कृतिक परम्पराओं पर चर्चा
राजपाल के स्टॉल पर हरिराम मीणा का आदिवासी नरसंहार पर आधारित उपन्यास ‘धूणी तपे तीर’, 1857 की क्रांति पर भगवंत अनमोल की ‘बावनी इमली’ और देवदत्त पटनायक की ‘भारतीय धार्मिक सांस्कृतिक परम्पराओं में कमल’ चर्चा में हैं।
राजकमल प्रकाशन के स्टॉल पर मृणाल पांडे की नारी मुक्ति पर आधारित ‘उड़ती स्त्री’, मनीषा कुलश्रेष्ठ की ‘मेघदूत की राह के पथिक’, शांत्वना दूबे तिवारी की ‘मेरी न्यूयॉर्क डायरी’ और नेहा दीक्षित की अनूदित किताब ‘कोई एक सईदा’ पाठकों को पसंद आ रही हैं।
देखिए 2 तस्वीरें…


रेखा अग्रवाल ने भजन सुनाए
सुबह अनंत अनुनाद के काव्य समारोह से पहले आर्थर्स अड्डा के संयोजन में अदिति कुमार, उषा कुमार, विनीत के. त्रिपाठी और विजय पाल सिंह ने अपनी किताबों पर चर्चा की। रेखा अग्रवाल ने भजन सुनाए। दूसरे मंच पर साहित्य सभा की परिचर्चा में संजय जायसवाल, सर्वेश अस्थाना सहित अन्य साहित्यकारों ने विचार रखे। पुस्तक प्रेमियों ने अपनी रचनाएं भी सुनाईं।
आचार्य श्रीराम शर्मा की रचित संपूर्ण साहित्य लगाई
उमानंद शर्मा, गायत्री परिवार लखनऊ ने बताया कि गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित संपूर्ण साहित्य की स्टॉल लगाई गईं हैं। इस साहित्य में व्यक्ति निर्माण, परिवार निर्माण, समाज निर्माण, राष्ट्र संबंधी विषयों के साथ साइंटिफिक विषयों पर भी सामग्री उपलब्ध है। छात्रों, नारियों, बुद्धिजीवियों, उच्च शिक्षितों और समाजसेवियों के लिए भी साहित्य है।

