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लखनऊ में शनिवार को गांधी जयंती के मौके पर लखनऊ में ‘वोट चोरी’ के आरोपों के खिलाफ नागरिक मार्च ने विरोध प्रदर्शन। परिवर्तन चौक से प्रस्तावित इस मार्च में बड़ी संख्या में नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता , समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल हुए।और विभिन्न जन आंदोलनों से जुड़े लोग शामिल हुए। मार्च के लिए लोगों के जुटते ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया। प्रदर्शन में लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. रूपरेखा वर्मा, पॉलिटिकल सटायरिस्ट राजीव ध्यानी, डॉ. मेडुसा, दुर्गेश चौधरी, जूही सिंह और नेहा यादव समेत कई नागरिक शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा को लेकर आवाज उठाई। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के दौरान भी प्रदर्शनकारियों की ओर से नारेबाजी जारी रही। ‘गिरफ्तारी से आवाज नहीं दबेगी’ प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता सुधांशु बाजपेई ने कहा कि चुनाव और वोट से जुड़े सवाल केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर सवाल उठाने वाले नागरिकों को प्रदर्शन से रोककर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती के दिन नागरिक अपने मताधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े सवालों को लेकर सड़क पर उतरे हैं। उनका कहना था कि लोकतंत्र में जनता को सवाल पूछने और अपनी बात रखने का अधिकार है। गिरफ्तारी के बावजूद संघर्ष जारी रखने की बात भी उन्होंने कही। दिल्ली-मुंबई समेत कई शहरों में मार्च का आह्वान AISA के ज्वाइंट सेक्रेटरी हर्ष ने कहा कि वोट चोरी और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर 2 अक्टूबर को दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों में प्रदर्शन और मार्च का आह्वान किया गया था। उत्तर प्रदेश में भी 2 से 8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ और ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ मार्च के कार्यक्रम घोषित किए गए हैं। मगर ये तानाशाही सरकार पुलिस के दम पर हमें दबाने की कोशिश कर रही। हमारे साथियों के साथ अभद्रता करते हुए हिरासत में लिया गया।
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लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन:नागरिक मार्च सड़क पर उतरा 'वोट चोरी’ का आरोप लगाया , पुलिस से हुई नोंकझोंक