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गोंडा में करीब 30 साल से चल रहे सरकारी नजूल भूमि विवाद में नया मोड़ आया है वादी दयानंद मिश्रा ने आज सोमवार दोपहर 2.30 बजे खुद सरकारी जमीन से अपना कब्जा हटा लिया। इसी जमीन को लेकर कमिश्नर दुर्गा शक्ति नागपाल और सिविल जज सीनियर डिवीजन सबीना खातून के बीच विवाद शुरू हुआ था। यह मामला गोंडा में आयुक्त कार्यालय के लिए आरक्षित नजूल भूखंड संख्या 514, 515, 524 और 525 से जुड़ा है। यह प्रकरण 1997 से कोर्ट में लंबित था। 2008 में स्थगन आदेश के बाद भी कानूनी पैरवी जारी रही। सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के अभियान में यह मामला प्रशासन के सामने आया। मंडलायुक्त दुर्गा शक्ति नागपाल ने इसकी समीक्षा कर मजबूत कानूनी पैरवी के निर्देश दिए। जांच में सामने आया कि जमीन पर अवैध स्कूल भी चल रहा था। दयानंद मिश्रा ने कोर्ट में शपथ-पत्र देकर आगे पैरवी न करने का अनुरोध किया।मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संबंधित पक्ष ने न्यायालय में कानूनी पैरवी से पीछे हटने के साथ ही मौके से अपना कब्जा भी हटा लिया। यानी तीन दशक से लंबित विवाद में अब अदालत की कार्यवाही के स्तर पर भी बदलाव आया और जमीन की भौतिक स्थिति भी बदल गई। आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा वर्ष 1997 में शुरू हुए इस विवाद को न्यायालयीन प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके हैं। 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को अब सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 1997 में शुरू हुए इस विवाद को न्यायालयीन प्रक्रिया में करीब तीन दशक हो चुके हैं। 2008 के स्थगन आदेश के बाद भी मामला लंबित रहा। अब 2026 में वादी के शपथ-पत्र और मौके से कब्जा हटने के बाद प्रशासन के सामने इन भूखंडों को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है। आयुक्त कार्यालय एवं भवन के लिए आरक्षित इन भूखंडों को अब सुरक्षित रखते हुए निर्धारित शासकीय प्रयोजन में उपयोग सुनिश्चित करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
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30 साल पुराने नजूल भूमि प्रकरण में बड़ा मोड़:30 साल पुराने मामले में विवादित नजूल भूखंड से वादी ने खुद हटाया कब्जा