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प्रयागराज में जनशिकायतों के निपटारे में कई विभागों के अधिकारी-कर्मचारी मनमानी कर रहे थे। जब निपटाए गए मामलों की जांच हुई, तो अफसरों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई। जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने सोरांव तहसील की जनशिकायतों के निपटारे की अचानक जांच करवाई। इसमें पता चला कि 6 लेखपाल, 2 कानूनगो, 2 दरोगा, एक ग्राम पंचायत अधिकारी (सेक्रेटरी) और बिजली विभाग के एक जेई ने फर्जी रिपोर्ट लगाकर शिकायतों का निपटारा कर दिया था। डीएम ने इन सभी कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। डीएम ने बताया कि सोरांव तहसील में हाल ही में हुए संपूर्ण समाधान दिवस में निपटाए गए 51 मामलों की अचानक जांच की गई। इन सभी मामलों की गहराई से जांच 17 जिला स्तरीय अधिकारियों ने की। इस अचानक जांच में 12 ऐसे मामले मिले, जिनमें शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। इससे साफ हो गया कि संबंधित कर्मचारियों ने जमीन पर समस्याओं को ठीक से हल करने के बजाय सिर्फ कागजी और ऊपरी रिपोर्ट (फर्जी रिपोर्ट) पेश करके बड़े अधिकारियों को गुमराह किया था। शिकायतकर्ताओं की खराब प्रतिक्रिया और फर्जी निपटारे की पुष्टि होने के बाद, जिलाधिकारी के सख्त आदेश पर इन सभी 12 लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई में लेखपाल प्रदीप कुमार विश्वकर्मा और मो. वारिस को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। इसके अलावा, उप निरीक्षक रवेन्द्र कुमार (थाना होलागढ़), लेखपाल वेद प्रकाश द्विवेदी (सोरांव), लेखपाल ज्ञान प्रकाश (सोरांव), राजस्व निरीक्षक अवधेश सिंह (सोरांव), लेखपाल वीरेन्द्र सिंह, ग्राम पंचायत अधिकारी राजेश मिश्रा, उप निरीक्षक प्रकाश सिंह (थाना नवाबगंज) और राजस्व निरीक्षक लाल बहादुर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विद्युत विभाग मऊदोस्तपुर के अवर अभियंता (जेई) को कड़ी चेतावनी दी गई है। साथ ही, मेण्डारा के लेखपाल सुधीर कुमार पाण्डेय को भी चेतावनी मिली है।
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प्रयागराज में जनशिकायतों के फर्जी निस्तारण में 12 कर्मी फंसे:6 लेखपाल, 2 कानूनगो, 2 दरोगा, सेक्रेटरी और जेई पर कार्रवाई के निर्देश