कानपुर देहात2 मिनट पहले
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कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर बुधवार को कानपुर देहात पहुंचे। यहां उन्होंने CAA-NRC, वक्फ संपत्तियों, रोजगार और समाजवादी पार्टी के नेताओं के रिश्तों समेत कई मुद्दों पर विपक्ष को घेरा। राजभर ने योगी सरकार में साढ़े नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दिए जाने का दावा किया। उन्होंने राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी अपनी बात रखी।
CAA-NRC पर विपक्ष से किया सवाल
ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि जब NRC और CAA लागू करने की बात आई थी, तब विपक्ष इसे मुसलमानों की नागरिकता छीनने वाला कानून बता रहा था। उनके मुताबिक, सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह नागरिकता देने का कानून है। राजभर ने सवाल किया कि कानून लागू हुए कई साल हो गए, लेकिन क्या एक भी मुसलमान को देश से बाहर निकाला गया? उन्होंने कहा कि अब NRC और CAA पर कोई बात नहीं कर रहा है।
वक्फ संपत्तियों को लेकर सपा-कांग्रेस पर आरोप
वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को लेकर राजभर ने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस की सरकारों के दौरान करोड़ों रुपए की संपत्तियां हजारों रुपए में बेच दी गईं। उन्होंने कहा कि कुछ संपत्तियों पर मॉल और होटल बनाए गए, जबकि कुछ को बेच दिया गया।
राजभर के अनुसार, जब सरकार ने वक्फ संपत्तियों को भूमि पोर्टल पर दर्ज कराने का फैसला लिया, तब भी विरोध हुआ। उन्होंने दावा किया कि संपत्तियों से जुड़े फैसलों का विरोध करने के पीछे ऐसे लोगों के हित हैं।
रोजगार और ऋण योजनाओं का किया जिक्र
रोजगार के मुद्दे पर राजभर ने विपक्ष से समाजवादी पार्टी का चश्मा उतारकर देखने की बात कही। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार ने साढ़े नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं।
उन्होंने कहा कि जिन युवाओं को सरकारी नौकरी नहीं मिली, उनके लिए पांच लाख रुपये तक का बिना ब्याज और बिना गारंटी ऋण लेकर कारोबार शुरू करने की योजना लाई गई है। राजभर ने दावा किया कि इस योजना से दो लाख से अधिक लोगों को फायदा मिला है।
उन्होंने रोजगार मेलों का जिक्र करते हुए कहा कि युवाओं को उनकी रुचि के अनुसार रोजगार के लिए प्रशिक्षण और ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। विपक्ष पर तंज कसते हुए राजभर ने कहा कि यदि विपक्ष सरकार के काम की तारीफ करेगा और फिर जनता के बीच वोट मांगने जाएगा, तो लोग उससे सवाल करेंगे कि जब सरकार अच्छा काम कर रही है तो वोट क्यों मांगे जा रहे हैं।
अखिलेश-शिवपाल के रिश्तों पर टिप्पणी
सपा के अंदरूनी राजनीतिक घटनाक्रम पर राजभर ने अखिलेश यादव और शिवपाल यादव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव अपने पिता को धक्का देकर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और सरकार में शिवपाल यादव को मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया गया। राजभर के मुताबिक, इसके बाद नाराज होकर शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाई, जिसका बाद में सपा में विलय हो गया।
राम मनोहर लोहिया ट्रस्ट से शिवपाल यादव को हटाए जाने के मुद्दे पर राजभर ने पूर्वांचल की एक कहावत का हवाला देते हुए कहा कि शिवपाल यादव पर हमेशा शंका की जाती रही है। उन्होंने ट्रस्ट से हटाए जाने को इसी घटनाक्रम से जोड़कर देखा।
राहुल गांधी और चुनाव आयोग पर भी निशाना
राजभर ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वह विदेश जाते हैं तो भारत को कठघरे में खड़ा करते हैं। लोकसभा चुनाव के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाने को लेकर भी उन्होंने राहुल गांधी की आलोचना की। राजभर ने कहा कि यदि चुनाव जीतने के बाद भी चुनाव आयोग पर टिप्पणी की जा रही है तो पहले इस्तीफा दे देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी करने वालों को पहले उनकी सरकार के कामकाज को देखना चाहिए, तभी वास्तविकता समझ में आएगी।


