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चित्रकूट (कर्वी) में धर्म, शिक्षा और सामाजिक चेतना को एक सूत्र में पिरोने के उद्देश्य से सर्वत्र शिक्षा समिति द्वारा संचालित चित्रकूट संस्कार पाठशाला की दो-दिवसीय संवेदीकरण कार्यशाला रविवार को संपन्न हुई। आयोजकों ने बताया कि अब संस्कारों की अलख शहर ही नहीं, हर गाँव-गली तक पहुँचेगी। कार्यशाला का मुख्य फोकस ग्रामीण अभिभावकों, युवाओं और स्थानीय शिक्षकों को संस्कार-आधारित शिक्षा के मॉडल से जोड़ना रहा। इसमें सुबह की प्रार्थना, योग-ध्यान, नैतिक कथा-सत्र और सामुदायिक सेवा जैसे अभ्यास शामिल थे। वक्ताओं ने बच्चों में मूल्यों की मजबूत नींव रखने पर जोर दिया। संवेदीकरण सत्र में प्रतिभागियों को बताया गया कि संस्कार पाठशाला केवल पाठ्यक्रम नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में आचरण, स्वच्छता, बड़ों का सम्मान और पर्यावरण-संरक्षण जैसे व्यावहारिक संस्कार सिखाने का मंच है। आसपास के ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और युवा मंडलों ने ‘हर बस्ती में एक संस्कार केंद्र’ स्थापित करने का संकल्प लिया। प्रशिक्षण मॉड्यूल में कहानी-कथन, भजन-कीर्तन, सामूहिक खेल और श्रमदान-आधारित गतिविधियों का प्रदर्शन किया गया, ताकि कम संसाधनों में भी केंद्र संचालित हो सकें। सर्वत्र शिक्षा समिति के प्रतिनिधियों ने कहा कि चित्रकूट केंद्र को एक मॉडल बनाकर इसे बुंदेलखंड के अन्य ब्लॉकों में भी दोहराया जाएगा। समिति पहले से ही शिक्षा-प्रसार के विविध कार्यक्रम संचालित कर रही है।
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चित्रकूट में संस्कार पाठशाला कार्यशाला संपन्न:सर्वत्र शिक्षा समिति ने गांव-गांव तक शिक्षा पहुंचाने का संकल्प लिया