महाकाल की सवारी में उज्जैन के 5 कलाकार शाही अंदाज में शामिल होते हैं।
भादौ के दूसरे सोमवार पर आज उज्जैन में बाबा महाकाल की राजसी सवारी निकाली जाएगी। इसका मार्ग करीब साढ़े पांच किलोमीटर का होगा। सवारी में शामिल होने के लिए देशभर से श्रद्धालु आएंगे।
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इससे पहले सावन की चार और भादौ की एक सवारी निकल चुकी है। ये छठी और आखिरी सवारी है। इसमें केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादत्य सिंधिया पालकी का पूजन करेंगे।
महाकाल की सवारी में 5 कलाकारों की एक ऐसी टोली भी शामिल होती है, जिनकी वेशभूषा और अंदाज श्रद्धालुओं का ध्यान खुद-ब-खुद खींच लेता है। खास तरह की पगड़ी, आभूषण और पारंपरिक हथियार वाले इस रूप में तैयार होने के लिए करीब दो घंटे तक मेकअप किया जाता है। इसके बाद 11 से 15 किलो तक की राजसी पोशाक पहनकर ये किरदार पूरी सवारी में पैदल चलते हैं।

बाबा महाकाल की सवारी में कुछ कलाकार विशेष रूप से तैयार होकर शामिल होते हैं।
शिक्षक ने शुरू की परंपरा, 39 साल से निभा रहे किरदार
महाकाल की सवारी में शामिल होने वाली इस टोली में स्वामी मुस्कुराके, स्वामी खिलखिलाके, स्वामी दिलमिलाके, स्वामी गुदगुदाके और पप्पू तलवार शामिल हैं। बाबा की पालकी के आगे चलने वाली यह टोली अलग-अलग राजसी किरदारों में नजर आती है। हर साल इनका लुक अलग होता है।
इस टोली के मुखिया शैलेंद्र व्यास उर्फ ‘स्वामी मुस्कुराके’ 39 साल से लगातार महाकाल की सवारी में शामिल हो रहे हैं। वे उज्जैन के ही रहने वाले हैं। 1989 में शिक्षक की नौकरी के दौरान उन्हें पता चला कि पुराने समय में राजा अपनी राजसी वेशभूषा में महाकाल की सवारी में शामिल होते थे।
इसी परंपरा से प्रभावित होकर उन्होंने पहली बार धोती-कुर्ता और साफा पहनकर सवारी में हिस्सा लिया। इसके बाद यह सिलसिला कभी नहीं टूटा।
देखिए, 3 तस्वीरें…

शैलेंद्र व्यास के पास 150 से ज्यादा ड्रेस, 200 पगड़ियां, 100 से ज्यादा माला-अंगूठियां हैं।

स्वामी मुस्कुराके ने सवारी में पहनी जाने वाली पोशाकों का संग्रह तैयार कर रखा है।

शैलेंद्र व्यास के इस कलेक्शन की कीमत 10 लाख रुपए से ज्यादा है।
15 किलो की ड्रेस पहनकर चलते हैं रिटायर्ड बैंक अधिकारी
दिनेश रावल उर्फ स्वामी दिलमिलाके पिछले 30 वर्ष से इस टोली का हिस्सा हैं। पंजाब नेशनल बैंक से रिटायर्ड रावल के पास भी 65 से ज्यादा राजसी ड्रेस हैं। करीब 7 लाख रुपए की इन पोशाकों को उन्होंने संभालकर रखा है।
वे बताते हैं कि सवारी में शामिल होने के लिए सिर्फ पोशाक पहनना ही काफी नहीं होता। पहले मेकअप, फिर 15 किलोग्राम तक की भारी पोशाक और आभूषण पहनकर कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। हालांकि, बाबा महाकाल की आस्था के कारण थकान महसूस नहीं होती।

दिनेश रावल स्वामी दिलमिलाके का रूप धरकर सवारी में शामिल होते हैं।
कपड़ा व्यापारी 38 साल से राजसी रूप में शामिल हो रहे
मनोहर गुप्ता यानी स्वामी खिलखिलाके भी 38 साल से इस टोली के सदस्य हैं। उनके पास करीब 25 राजसी ड्रेस हैं, जिनकी कीमत 3 लाख रुपए से ज्यादा है।
वे जिस शहर में जाते हैं, वहां राजसी वेशभूषा या उससे जुड़ी कोई खास चीज पसंद आने पर खरीद लेते हैं।

इस साल भादौ की पहली सवारी में सीएम डॉ. मोहन यादव भी शामिल हुए थे।
6 अलग-अलग स्वरूप में दर्शन देंगे महाकाल
आज भादौ के दूसरे सोमवार पर शाम 4 बजे महाकाल मंदिर में पूजन के बाद सवारी उठेगी। सबसे आगे महाकालेश्वर मंदिर का प्रचार वाहन रहेगा। इसके बाद भजन मंडली, यातायात पुलिस, तोपची, भगवान महाकाल का रजत ध्वज, घुड़सवार, विशेष सशस्त्र बल सलामी गार्ड, स्काउट-गाइड सदस्य, कांग्रेस सेवा दल और सेवा समिति बैंड रहेगा।
इसके बाद उज्जैन सहित प्रदेश के अलग-अलग शहरों की करीब 70 भजन मंडलियां होंगी। इनके पीछे भगवान महाकाल की प्रमुख पालकी और 6 स्वरूप रहेंगे।

पहली बार ड्रोन से पुष्पवर्षा, 50 क्विंटल फूल मंगाए
मंदिर प्रशासन के अनुसार, राजसी सवारी में विशेष ड्रोन से पुष्पवर्षा की जाएगी। इसके लिए देश-विदेश की किस्मों के करीब 50 क्विंटल फूल मंगाए जा रहे हैं।
शहनाई गेट पर गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान पहली बार ड्रोन से पुष्पवर्षा होगी। इसके बाद शिप्रा तट और गोपाल मंदिर पर भी फूल बरसाए जाएंगे।

आकाशवाणी पर 8 घंटे लगातार लाइव प्रसारण
आकाशवाणी, उज्जैन द्वारा आज दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक महाकाल की राजसी सवारी का लगातार 8 घंटे सीधा प्रसारण किया जाएगा। यह मध्य प्रदेश के सभी आकाशवाणी केंद्रों से एक साथ प्रसारित होगा।
प्रसारण में सवारी के मार्ग, प्रमुख पड़ाव, धार्मिक अनुष्ठान, परंपराओं और श्रद्धालुओं की आस्था का आंखों-देखा हाल सुनाया जाएगा। इस विशेष प्रसारण को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने के लिए नामांकित किया गया है।
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उज्जैन में भादौ माह की पहली और महाकाल की पांचवीं सवारी सोमवार शाम 4 बजे निकली। बाबा महाकाल पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकले। इस दौरान श्रद्धालुओं को भगवान महाकाल के पांच स्वरूपों के दर्शन हुए। सवारी में पहली बार शामिल किया गया रोबोट सबसे अलग आकर्षण रहा। पढ़ें पूरी खबर…