सुजीत कुमार | बलरामपुर5 मिनट पहले
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बलरामपुर में स्वास्थ्य विभाग बच्चों की बीमारियों को गंभीर होने से पहले ही पहचान रहा है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच जिले में 1,31,772 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। इनमें 47,385 स्कूली बच्चे और 84,387 आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे शामिल थे।
इस जांच के दौरान 9,018 बच्चों में अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याएं मिलीं। इन बच्चों को जरूरी सलाह और बेहतर इलाज के लिए संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा गया। चार महीने के आंकड़ों के अनुसार, जांचे गए बच्चों में से करीब 6.8 प्रतिशत बच्चों को आगे इलाज की जरूरत पाई गई। इस दौरान औसतन हर दिन 1,100 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई।
मोबाइल हेल्थ टीमें तय माइक्रोप्लान के हिसाब से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचीं और बच्चों की स्वास्थ्य जांच की।
इस पहल की खास बात यह है कि बच्चों को जांच के लिए अस्पताल नहीं आना पड़ रहा। बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं उनके स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंच रही हैं।
RBSK कार्यक्रम के तहत बच्चों में जन्मजात स्वास्थ्य समस्याएं, बीमारियां, पोषण संबंधी कमियां, देखने और सुनने से जुड़ी दिक्कतें, दांतों की परेशानी, एनीमिया, कुपोषण और शारीरिक व मानसिक विकास में देरी जैसे स्वास्थ्य संकेतों की पहचान की जाती है।

प्राथमिक स्कूल में बच्चों को दवा दी गई।
कई बार बच्चों की कमजोर नजर, सुनने में परेशानी या एनीमिया जैसी समस्याएं शुरुआत में परिवार को साफ पता नहीं चलतीं। ऐसे में नियमित जांच इन समस्याओं को शुरुआती दौर में पकड़ने में मदद करती है, जिससे समय पर डॉक्टर की सलाह और इलाज शुरू किया जा सके।
जिन बच्चों में समस्या मिली है, उन्हें संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों और जरूरत पड़ने पर बड़े अस्पतालों से जोड़कर इलाज और फॉलोअप सुनिश्चित किया जा रहा है। योग्य बच्चों को जरूरी मेडिकल सहायता मिलने से परिवारों पर इलाज का आर्थिक बोझ भी कम होता है।
