साइबर फ्राॅड में जेल जाओगे, कहकर 3 लाख वसूले:नौकरी के बहाने आधार-पैन लेकर आईडी बनाई, फिर खाते में मंगाए लाखों रुपये


प्रयागराज में नौकरी की तलाश में एक युवक जिस दुकान पर पहुंचा, वहां उसे रोजगार तो मिला, लेकिन इसी नौकरी के बहाने उसके दस्तावेज ही साइबर फ्रॉड के जाल में फंसा दिए गए। आरोप है कि दुकान संचालक ने युवक के आधार, पैन, बैंक पासबुक और फोटो का इस्तेमाल कर कई ऑनलाइन फाइनेंस कंपनियों में उसके नाम से आईडी बनवा लीं। इन्हीं आईडी और बैंक खाते के जरिए लेनदेन होता रहा। युवक को इसकी भनक तक नहीं लगी।
करीब एक महीने बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया कि युवक के घर तीन लोग पहुंच गए। खुद को साइबर क्राइम विभाग का अधिकारी बताया और कहा-तुमने फ्रॉड किया है, अब जेल जाओगे। इसके बाद युवक और उसके बीमार पिता को कार में बैठाकर बंधक बना लिया गया। मामला रफा-दफा करने के नाम पर साढ़े तीन लाख रुपये मांगे गए। आखिरकार परिवार ने जेवर गिरवी रखकर तीन लाख रुपये दिए, तब जाकर युवक को छोड़ा गया।
अब पीड़ित की शिकायत पर कर्नलगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वर्क इंडिया एप से मिली थी नौकरी
फाफामऊ के शिवलाल का पूरा निवासी अमन पटेल ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उसने 21 जून को वर्क इंडिया एप के माध्यम से बैंक रोड, कटरा स्थित डीईए सॉल्यूशन में नौकरी के लिए आवेदन किया था। 24 जून को इंटरव्यू हुआ। दुकान संचालक सौरभ कुमार ने उसे बताया कि काम में आधार आधारित नकद निकासी, फोटोस्टेट और ऑनलाइन सेवाएं शामिल हैं। वेतन 12 हजार रुपये और प्रतिदिन 100 रुपये खर्च देने की बात कही गई।
25 जून को नौकरी ज्वाइन करते समय अमन से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और फोटो ले लिए गए। इसके बाद वह रोज दुकान जाने लगा।
कई कंपनियों में बना दी ऑनलाइन आईडी
आरोप है कि सौरभ कुमार ने अमन के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर डॉग्मा सॉफ्ट, एपीवाई प्वाइंट, पे बिंगो, पेआईएल, रैनेट, धनु पे, धनहिंद, ई-कैस्प्स और पे नियरबाई समेत कई ऑनलाइन फाइनेंस सर्विस कंपनियों में आईडी बनवा दीं।
खास बात यह थी कि इन आईडी में अमन का नहीं, बल्कि सौरभ का मोबाइल नंबर और ई-मेल लगाया गया। अमन ने जब इस बारे में पूछा तो कथित तौर पर उसे यह कहकर चुप करा दिया गया कि दुकान उसकी है, इसलिए आईडी वही चलाएगा।
खाते में आते रहे रुपये, कराई जाती रही निकासी
तहरीर के मुताबिक, सौरभ अलग-अलग लोगों से प्राप्त रकम अमन के बैंक खाते में मंगवाता था। वह अमन को बताता था कि उसका गोदाम दूसरी जगह है और वहां से माल बेचने के बाद रकम खाते में आती है।
रुपये आने के बाद कभी अमन से नकद निकलवाए जाते तो कभी ऑनलाइन आईडी के जरिए दूसरी जगह रकम ट्रांसफर कराई जाती। अमन का कहना है कि वह सौरभ को अपना मालिक समझकर उसके निर्देशों का पालन करता रहा। उसे यह अंदाजा नहीं था कि उसके नाम और दस्तावेजों का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जा रहा है। अमन के काम बंद करने पर संपर्क ही खत्म किया
24 जुलाई को अमन ने दुकान पर काम करना बंद कर दिया। उसी दिन सौरभ ने दुकान की चाबी यह कहकर ले ली कि अगले दिन किसी के हाथ भिजवा देगा। अगले दिन अमन ने फोन किया तो सौरभ ने बाद में संपर्क करने की बात कही। इसके बाद उसने अमन से संपर्क ही खत्म कर दिया। अमन को तब भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि उसके दस्तावेजों के साथ क्या खेल हो चुका है।
घर पहुंचे तीन लोग, बोले- साइबर क्राइम विभाग से हैं
31 जुलाई की शाम करीब साढ़े सात बजे नीले रंग की बलेनो कार से तीन लोग अमन के घर पहुंचे। उन्होंने खुद को साइबर क्राइम विभाग का अधिकारी बताया। कहा कि अमन के खिलाफ फ्रॉड की शिकायत है और अगले दिन पूरी बात बताई जाएगी।
अगले दिन 1 अगस्त को सुबह करीब साढ़े दस बजे एक मोबाइल नंबर से अमन को फोन कर बैंक रोड स्थित दुकान पर बुलाया गया। अमन अपने पिता के साथ वहां पहुंचा। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे परिवार को दहला दिया।
कार में बैठाया और कहा- 3.50 लाख दो, नहीं तो जेल जाओगे
अमन का आरोप है कि दुकान पर पहुंचते ही तीनों लोगों ने उसे और उसके पिता को कार में बैठा लिया। दोनों को धमकाया गया कि उन्होंने फ्रॉड किया है और उन्हें जेल भेज दिया जाएगा। इसके बाद मामला खत्म करने के लिए 3.50 लाख रुपये की मांग की गई।
अमन के मुताबिक, उसके पिता हृदय रोग से पीड़ित हैं। धमकी और दबाव में उन्होंने उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक की हाजिगंज शाखा स्थित अपने खाते से एक लाख रुपये निकाले और आरोपियों को दे दिए। लेकिन रकम मिलने के बाद भी आरोपियों ने उन्हें नहीं छोड़ा। बेटे को रोके रखा, पिता से कहा- बाकी पैसे लेकर आओ
आरोप है कि तीनों ने अमन को अपने कब्जे में रखा और उसके पिता को बाकी रकम की व्यवस्था करने के लिए भेज दिया। साथ ही धमकी दी कि यदि घटना के बारे में किसी को बताया तो परिणाम गंभीर होंगे। परिवार के पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी। आखिरकार अमन के माता-पिता ने घर के जेवर गिरवी रखकर दो लाख रुपये जुटाए।
शांतिपुरम में तीन लाख दिए, तब छूटा अमन
आरोपियों के कहने पर परिवार शांतिपुरम में प्राची अस्पताल के पास पहुंचा। वहां उन्हें कुल तीन लाख रुपये नकद दिए गए। इसके बाद आरोपियों ने अमन को छोड़ दिया और वहां से चले गए।
यानी साढ़े तीन लाख रुपये की मांग के बाद आरोपियों ने परिवार से तीन लाख रुपये वसूल लिए।
फोन आने पर खुला दस्तावेजों के खेल का राज
घटना के बाद अमन के पास अलग-अलग कंपनियों से फोन आने लगे। इन आईडी से संबंधित गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलने पर उसे पता चला कि उसके दस्तावेजों के आधार पर कई ऑनलाइन आईडी संचालित की जा रही थीं।
तब उसे आशंका हुई कि नौकरी के दौरान जमा कराए गए उसके आधार, पैन और बैंक संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के लिए किया गया है।
अमन ने संबंधित कंपनियों को ई-मेल भेजकर अपने नाम से संचालित आईडी बंद करने की मांग की।
अब पुलिस खंगालेगी बैंक खाते, आईडी और कार के सुराग
पुलिस आयुक्त को दिए गए प्रार्थना पत्र में अमन ने सौरभ कुमार, उसके सहयोगियों और खुद को साइबर क्राइम अधिकारी बताकर उसे बंधक बनाने वाले अज्ञात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर कर्नलगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।
अब जांच में सबसे अहम सवाल यह है कि अमन के दस्तावेजों से बनाई गई आईडी का इस्तेमाल किन-किन लोगों से लेनदेन के लिए हुआ? बैंक खाते में कहां-कहां से रकम आई? सौरभ कुमार की भूमिका क्या थी और तीन लाख रुपये वसूलने वाले तीनों लोग कौन थे? कर्नलगंज थाना प्रभारी ज्ञानेश्वर मिश्रा का कहना है कि पुलिस बैंक स्टेटमेंट, संबंधित कंपनियों की आईडी, मोबाइल नंबर, ई-मेल, सीसीटीवी फुटेज और नीली बलेनो कार के नंबर के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

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