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यूपी आउटसोर्स सेवा निगम की वेबसाइट का बुधवार को सीएम योगी ने लोकार्पण किया। उन्होंने निगम के लोगो का अनावरण करने के साथ आउटसोर्स कर्मियों को चेक भी बांटे। निगम के शुरू होने के साथ प्रदेश के 3.5 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों की सैलरी 7 हजार बढ़ी दी गई है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा- हर आउटसोर्स कर्मचारी को उसकी मेहनत के अनुरूप मानदेय मिलेगा। पहले तो उनको पता ही नहीं चलता था कि कितना मानदेय मिल रहा।पहले यह होता था कि हम लोग जाते थे और कर्मचारी से पूछते थे कि कितना मानदेय मिल रहा है। वह बताता था कि कागज पर 9 हजार रुपये है, लेकिन उसे 6 हजार रुपये ही मिल रहे हैं। बाकी रुपये कहां जाते हैं? उन्होंने बताया कि कोई आउटसोर्स कंपनी आपको निकाल नहीं सकती। अगर आपको निकालना है तो उसे सरकार को रिपोर्ट करना होगा। हम जांच करेंगे उसके बाद कोई कार्रवाई हो सकेगी। देखिए तस्वीरें… सीएम योगी के स्पीच की प्रमुख बातें… 1- हमारी व्यवस्था पहले तीन खेमों में बंटी थी सीएम योगी ने कहा- पहले हमारी व्यवस्था तीन खेमों में बंटी थी। एक तरफ कार्मिक कर्मचारी होता था, दूसरी तरफ एजेंसी होती थी और तीसरी ओर सरकार होती थी। अक्सर हमारे कर्मचारी को अपनी समस्या लेकर अलग-अलग दरवाजों पर जाना होता था। लेकिन समाधान नहीं होता था। सेवा की गारंटी नहीं होती थी, समस्या की सुनवाई नहीं होती थी। उनकी पीड़ा कोई नहीं सुनता था। सरकार और कर्मचारी का रिश्ता केवल वेतन का नहीं हो सकता। वहां एक विश्वास का रिश्ता और जिम्मेदारी का रिश्ता होता था। कर्मचारी का जीवन कागजों और कार्यालयों के चक्कर में न बीते इसलिए हमने नई व्यवस्था लागू की है। 2- अब कर्मचारी अकेला नहीं है, सरकार उसके साथ सीएम ने कहा कि कर्मचारी को महसूस होना चाहिए कि उसके बेहतर काम का रिकॉर्ड रखा जा रहा है और उसके भविष्य को सुरक्षित रखने का ध्यान रखा जा रहा है। कर्मचारी अकेला नहीं है। उसे समय पर वेतन मिले और उसकी भविष्य निधि सुरक्षित रहे। हमारा मानना है कि सामाजिक भेदभाव दूर करने के लिए आर्थिक भेदभाव को दूर करना चाहिए। जब कोई व्यक्ति काम कर रहा है तो उसे उसके काम के अनुरूप सम्मान भी मिलना चाहिए। उसे सामाजिक सुरक्षा की गारंटी मिलनी चाहिए। कोई दुर्घटना होने पर वह अकेला न हो, बल्कि उसके साथ एक सुरक्षा कवर भी हो। जो जनता के मन से चले वहीं जनता की सरकार: ब्रजेश पाठक डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि बहुत लंबे समय से आप लोगों की डिमांड थी। मन में बहुत पीड़ा थी। आप सोचते थे कि नौकरी आज गई कि कल गई, डरते रहते थे। कभी सोचते थे कि ऐसा क्यों हो रहा है। मुख्यमंत्री ने इसका समाधान किया है। सरकारें तो सब चलती हैं, लेकिन जो सरकार जनता के मन से चले, वही जनता की सरकार है। हम तो यहीं पढ़े और पैदा हुए हैं। पहले सरकार घर से चलती थी। भैया 12 बजे सोकर उठते थे, फिर शाम को बैडमिंटन खेलते थे और रात को नेशनल कार्यक्रम होता था। नेशनल कार्यक्रम जानते हो कि नहीं? अब यूपी बढ़िया है कि नहीं, बताइए। जब पता चला कि भर्ती निगम बनाया जा रहा है तो मानकर चलो कि भगवान ने बुद्धि दे दी है। मुख्यमंत्री जी तो पूजा करते हैं। जिन मंदिरों में आशीर्वाद लेने जाते हैं, वहां मुख्यमंत्री ने पूरा जीवन बिता दिया है। पाठक ने कहा कि आप मानव संपदा हैं। देश और समाज के लिए काम कर रहे हैं। मन लगाकर काम करना। पहले सात-आठ हजार रुपये मिलते थे। पहले जो लगाता था, वही दाएं-बाएं करता रहता था। अब वह झंझट खत्म हो गया है। अब कोई चवन्नी नहीं लेगा। अब कोई नौकरी से निकाल भी नहीं पाएगा। कम से कम 20 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। जो बड़े पदों पर काम कर रहे हैं, उन्हें 40 हजार रुपये तक मानदेय मिलेगा। कभी कोई बात हो गई, दुर्घटना हो गई या अंगभंग हो गया तो 50 लाख रुपये का बीमा मिलेगा। कभी सोचा था कि फ्री में बीमा हो जाएगा? ये सब मुख्यमंत्री ने जुगाड़ किया है। जब सीएम आपके साथ हैं तो कुछ आपकी भी ड्यूटी है। अब मौका आ गया है। लोग आपको भड़काएंगे। उनके लिए जो वीडियो जारी हुआ है, वह सही है। पहले वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया था। उनके राज में विधानसभा चलती थी तो दस-दस बंदूक लेकर उनके लोग आते थे। अभी पश्चिम में गड़बड़ की तो पश्चिम में हिसाब साफ हो गया था। हिसाब यहीं होगा। सभी लोग इकट्ठा हो जाओ। साढ़े तीन लाख से ज्यादा लोग हैं आप लोग। सभी लोग जुट जाओ, दोबारा बना दोगे। तुम अपना काम करो, हम अपना काम करेंगे। कहीं चौराहे पर बैठो तो कहो कि सरकार भाजपा और कमल की बनानी है, योगी को फिर सीएम बनाना है। सड़कें फन्ने खां बनी हैं, बिजली आती है। हर जिले में मेडिकल कॉलेज बन गया है। स्कूलों में जूते, कॉपी और यूनिफॉर्म मिल रही है। पूरे देश में यूपी नंबर एक पर जा रहा है। पिछले साल बना था निगम, अब तक शुरू नहीं हुआ काम सीएम योगी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में प्रदेश में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती के लिए निगम बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद सरकार ने पिछले साल सितंबर में उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का गठन किया और IAS अधिकारी अमृता सोनी को निगम का प्रबंध निदेशक बनाया। सचिवालय प्रशासन विभाग को निगम का नोडल विभाग बनाया गया है। निगम के लिए पिकप बिल्डिंग में कार्यालय भी तैयार किया जा रहा है। बजट 426 करोड़ बढ़ाया, निगम चलाने के लिए 20 करोड़ मंजूर सीएम योगी ने विधानसभा में कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने का ऐलान किया था। सरकार ने बजट में 426 करोड़ का इजाफा किया था। 2223.84 करोड़ रुपए जारी किए गए थे। यूपी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम के संचालन के लिए 20 करोड़ रुपए शून्य ब्याज दर पर उपलब्ध कराने की मंजूरी भी दी थी। आउटसोर्स कर्मचारियों को मिलेंगे ये फायदे हर महीने 5 तारीख तक मिलेगा मानदेय- नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों का मानदेय हर महीने की 5 तारीख तक उनके बैंक खाते में पहुंच जाएगा। अगर कोई वेंडर कंपनी समय पर मानदेय का भुगतान नहीं करती है तो उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। अगर किसी कंपनी के खिलाफ लगातार तीन बार से ज्यादा शिकायत सही पाई जाती है, तो उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
महीने में 26 दिन काम, साप्ताहिक अवकाश- आउटसोर्स कर्मचारियों से महीने में 26 दिन काम लेने का प्रावधान है। कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए समय-समय पर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी लीव दी जाएगी। PF, ESI और मेडिक्लेम की सुविधा- मानदेय के साथ 13% EPF (एम्प्लॉयीज़ प्रोविडेंट फंड) और 3.25% ESI (एम्प्लॉयीज़ स्टेट इंश्योरेंस) की राशि भी समय पर जमा करनी होगी। निगम की ओर से यह भी देखा जाएगा कि कर्मचारियों के मानदेय के साथ EPF और ESI की राशि समय पर जमा हो रही है या नहीं। इसके अलावा मेडिक्लेम और एक्सीडेंटल बीमा की सुविधाएं मिलेंगी।
मृत्यु पर ₹15 हजार की अंत्येष्टि सहायता- सेवाकाल के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को 15 हजार रुपए की अंत्येष्टि सहायता देने का भी प्रावधान किया गया है। लिखित टेस्ट और इंटरव्यू से होगा सिलेक्शन कर्मचारियों का सिलेक्शन लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होगा। नई नियुक्तियों में अनुसूचित जाति (SC) को 21%, अनुसूचित जनजाति (ST) को 2%, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को 27% और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EWS) को 10% आरक्षण दिया जाएगा। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। वहीं, सरकारी विभागों में पहले से काम कर रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को नहीं हटाया जाएगा। टेंडर की शर्तों के मुताबिक उनकी सेवाएं जारी रहेंगी। इन 10 विभागों में सबसे ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी नगरीय निकाय
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
चिकित्सा शिक्षा
ऊर्जा
परिवहन
महिला एवं बाल कल्याण
कृषि
औद्योगिक विकास
एमएसएमई
श्रम विभाग पहले क्या गड़बड़ी थी – पहले कर्मचारियों की नियुक्तियां ठेके पर अलग-अलग एजेंसियां कर रही थीं। आरोप लग रहे थे कि कर्मचारियों का शोषण हो रहा था। उन्हें न तो समय पर वेतन मिल पाता था और न ही तय मानदेय। कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से इस तरह की शिकायतें आती रही हैं- जॉइनिंग से पहले पैसे लेना : कुछ वेंडर्स नौकरी देने से पहले कर्मचारियों से 1 से 2 महीने का मानदेय एडवांस में ले लेते हैं। मानदेय में कटौती : कई जगह कर्मचारियों के मानदेय का 10 से 20% हिस्सा नकद वापस लेने की शिकायतें सामने आती हैं। मनमाने तरीके से भर्ती : वेंडर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से अपनी पसंद के लोगों को नौकरी देने और योग्य युवाओं को मौका न मिलने की शिकायतें भी रहती हैं। बिना नोटिस नौकरी से हटाना : कई कर्मचारियों का आरोप है कि वेंडर्स और अधिकारी जब चाहें, बिना नोटिस दिए उन्हें नौकरी से हटा देते हैं। गलती की सजा दूसरी जगह ट्रांसफर : अगर कोई आउटसोर्स कर्मचारी गड़बड़ी करता है तो कई बार उसे नौकरी से हटाने के बजाय एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर में भेज दिया जाता है। इससे व्यवस्था में सुधार नहीं होता।
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यूपी के 3.5 लाख कर्मचारियों की सैलरी 7 हजार बढ़ी:योगी ने आउटसोर्स सेवा निगम की शुरुआत की, बोले- अब कंपनियां आपका शोषण नहीं कर सकतीं