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हमीरपुर में यमुना और बेतवा नदियां फिलहाल खतरे के निशान से करीब सात मीटर नीचे बह रही हैं, जिससे इन दोनों नदियों से फिलहाल बाढ़ का खतरा नहीं है। हालांकि बिरमा और चंद्रावल नदी का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास पहुंच गया है। दोनों नदियों के उफान पर होने से कई गांवों को जोड़ने वाले रास्ते और रपटे जलमग्न हो गए हैं। इससे ग्रामीणों का आवागमन प्रभावित हुआ है। जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में नावों के साथ राहत किट उपलब्ध कराई है। हमीरपुर में बाढ़ आने पर जिले के करीब 91 गांव प्रभावित होते हैं। वर्तमान में यमुना और बेतवा का जलस्तर खतरे के निशान से काफी नीचे होने के कारण इनसे बाढ़ जैसे हालात नहीं बने हैं। वहीं बिरमा और चंद्रावल नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से कुछ गांवों के रास्ते पानी में डूब गए हैं। जरूरी काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों के लिए प्रशासन ने नावों की व्यवस्था की है। दो ग्राम पंचायतों के मजरे करेरा और शिवनी बाढ़ से अधिक प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की ओर से यहां राहत किट उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजी जा रही हैं, ताकि ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधा मिल सके। बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने बाढ़ चौकियां और बाढ़ शिविर तैयार किए हैं। नावों की व्यवस्था के साथ राहत सामग्री और पशुओं के लिए भूसा-चारा भी उपलब्ध कराया गया है। आपदा मित्रों और गोताखोरों को अलर्ट मोड पर रखा गया है। यमुना, बेतवा समेत जिले की सभी प्रमुख नदियों के जलस्तर की जानकारी हर घंटे जुटाई जा रही है। जिलाधिकारी अभिषेक गोयल ने बताया कि फिलहाल यमुना और बेतवा नदियों से बाढ़ जैसे हालात की आशंका नहीं है। हालांकि बिरमा और चंद्रावल नदी का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास है। प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम कर लिए हैं। जहां नाव की जरूरत पड़ रही है, वहां नाव उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ से प्रभावित दो मजरे में राहत किट पहुंचाई गई हैं और डॉक्टरों की टीमें भी प्रभावित क्षेत्रों में भेजी जा रही हैं।
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हमीरपुर में यमुना-बेतवा सुरक्षित:बिरमा-चंद्रावल के उफान से गांवों के रास्ते डूबे, राहत किट और नाव की सुविधा