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कानपुर नगर निगम के मार्ग प्रकाश विभाग में हाजिरी लगाकर ड्यूटी से गायब रहने वाले एक और कर्मचारी पर नगर आयुक्त ने कार्रवाई की है। कई दिनों से मिल रही शिकायतों और जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद स्विचमैन कमरुद्दीन को निलंबित कर दिया गया है। कमरुद्दीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर दो ठेकेदारों को नगर निगम में काम दिलाने में मदद की और उनके ठेके में कमीशन भी लेता था।
कमरुद्दीन पर ड्यूटी में लापरवाही, अनुशासनहीनता, शिथिलता और शासकीय कार्य प्रभावित करने के आरोप लगाए गए हैं। नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने मामले की विभागीय जांच के लिए अपर नगर आयुक्त अनूप कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। 22 साल से भैरवघाट में तैनाती नगर निगम के सूत्रों के मुताबिक, कमरुद्दीन की वर्तमान तैनाती भैरवघाट के विद्युत शवदाह गृह में थी। करीब 22 साल से अधिक समय से वह तैनात था। इस दौरान कई बार उसका तबादला किया गया, लेकिन वह अपने प्रभाव के चलते दो से चार दिन में ही वापस उसी जगह आ जाता था। इतना ही नहीं मार्ग प्रकाश विभाग कमरुद्दीन ही चलाता था। स्विच, लाइटों और तार समेत अन्य उपकरणों की खरीद से लेकर उनके वितरण तक यही देखता था। विभाग के चीफ इंजीनियर के बाद इसी की चलती थी। नगर निगम में चला रहा था सिंडीकेट कमरुद्दीन ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर दो ठेकेदारों को नगर निगम में काम दिलाने में मदद की और उनके ठेके में कमीशन भी तय रहता था। जोनों की बैठक के दौरान महापौर प्रमिला पांडेय और नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय के सामने भी पार्षदों ने कमरुद्दीन की शिकायत की थी। पार्षदों ने कहा था कि कमरुद्दीन को कॉल करने पर फोन ही नहीं उठाते हैं और भैरोघाट कार्यालय में मिलते नहीं हैं और कई बार कहने के बावजूद भी स्ट्रीट लाइट सहित अन्य उपकरण उनके क्षेत्रों में नहीं दिए जाते हैं। हाजिरी लगाकर ड्यूटी से रहता गायब नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय को मार्ग प्रकाश विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। कमरुद्दीन को लेकर भी शिकायतें सामने आने के बाद जांच कराई गई। इसमें सामने आया कि वह कार्यालय पहुंचकर रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने के बाद ड्यूटी से चले जाते थे। उनके नियमित रूप से ड्यूटी पर मौजूद नहीं रहने के कारण विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे थे। स्ट्रीट लाइट और अन्य उपकरणों से संबंधित काम के लिए लोगों और पार्षदों को भी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते थे। जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद शुक्रवार को नगर आयुक्त ने कमरुद्दीन को निलंबित कर दिया। नगर आयुक्त ने बताया कि निलंबन अवधि में कर्मचारी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभागीय जांच की प्रक्रिया अलग से जारी रहेगी। जांच अधिकारी अपर नगर आयुक्त को निर्धारित समयावधि में जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्षदों ने भी की थी शिकायत सूत्रों के मुताबिक, शहर के कई पार्षद पहले भी कमरुद्दीन के खिलाफ शिकायत कर चुके हैं। आरोप था कि मांग के बावजूद स्ट्रीट लाइट और अन्य उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते थे, जिससे कई क्षेत्रों में मार्ग प्रकाश व्यवस्था प्रभावित हो रही थी। भैरवघाट कार्यालय पहुंचने पर कर्मचारी के नहीं मिलने और फोन नहीं उठाने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
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हाजिरी लगाकर ड्यूटी से गायब रहने वाला स्विचमैन कमरुद्दीन निलंबित:नगर निगम में 22 साल से एक ही जगह थी तैनाती, ठेकेदारों से लेता था कमीशन