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मेरठ में किसान नेता डॉ. दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ कथित पुलिस बर्बरता और थर्ड डिग्री के मामले में रविवार को नया मोड़ आ गया। 19 अगस्त को दोनों नेताओं के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे मोहम्मद फैजल ने सामने आकर घटनाक्रम को लेकर कई दावे किए हैं। फैजल का कहना है कि वह घटना के दौरान एसएसपी कार्यालय के बाहर मौजूद था और करीब 40 मिनट तक अंदर से चीख-पुकार और शोर सुनता रहा। फैजल ने यह भी दावा किया कि दोनों नेताओं को चेहरे पर कपड़ा बांधकर एसएसपी कार्यालय से बाहर लाया गया और पुलिस की गाड़ी में बैठाकर ले जाया गया। उसने पुलिस की उस कहानी को भी खारिज किया, जिसमें दोनों नेताओं के स्कूटी से गिरकर घायल होने की बात कही गई थी। फैजल के मुताबिक, तीनों सफेद स्कॉर्पियो से एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। उधर, इस मामले में सुर्खियों में आए इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार गौड़ को देर शाम एसएसपी ने निलंबित कर दिया। 19 अगस्त को एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे दोनों नेता पूरा मामला 19 अगस्त का है। एक मुकदमे के सिलसिले में किसान नेता डॉ. दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे से मिलने पुलिस कार्यालय पहुंचे थे। आरोप है कि मुलाकात के दौरान दोनों के साथ मारपीट की गई। आरोप यह भी है कि तत्कालीन एसएसपी ने दोनों से मारपीट की और बाद में पुलिसकर्मियों से उन्हें कमरे में ले जाकर पिटवाया। इसके बाद दोनों को चेहरे पर कपड़ा बांधकर बाहर लाया गया और सफेद बोलेरो में बैठाकर पुलिस लाइन स्थित एसओजी कार्यालय ले जाया गया। वहां तत्कालीन सिविल लाइन इंस्पेक्टर अखिलेश कुमार गौड़ और उनके साथियों पर दोनों को थर्ड डिग्री देने का आरोप लगाया गया। बाद में दोनों को सिविल लाइन थाने छोड़ दिया गया, जहां से आधी रात को सपा विधायक अतुल प्रधान उन्हें अपने साथ ले गए। अगले दिन वीडियो सामने आने के बाद बढ़ा विवाद 19 अगस्त की घटना के अगले दिन मामला तेजी से तूल पकड़ गया। किसान नेता दिग्विजय भाटी ने वीडियो जारी कर कथित पुलिस बर्बरता की जानकारी दी। इसके बाद सपा विधायक अतुल प्रधान दोनों नेताओं को साथ लेकर प्रेसवार्ता में पहुंचे और तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे पर गंभीर आरोप लगाए। मामले के बीच तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे का मेरठ से तबादला कर उन्हें पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। इसी दिन नए एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने मेरठ की कमान संभाली। एडीजी जोन भानु भास्कर के निर्देश पर सहारनपुर डीआईजी अभिषेक सिंह भी मामले की जांच के लिए मेरठ पहुंचे। आठ पुलिसकर्मी लाइन हाजिर मामले की गंभीरता को देखते हुए शनिवार को एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति ने कार्रवाई करते हुए सिविल लाइन एसएचओ अखिलेश कुमार गौड़, उप निरीक्षक मुलायम सिंह, हेड कांस्टेबल हरिओम और श्याम बाबू, कांस्टेबल सुमित कुमार और मुकेश कुमार, महिला कांस्टेबल नीलम लौर तथा चालक ललित कुमार को लाइन हाजिर कर दिया। इसके साथ ही सिविल लाइन थाने का चार्ज पीआरओ उप निरीक्षक अरुण भाटी को सौंपा गया। वहीं पुलिस लाइन से सुदीश सिंह सिरोही को नया पीआरओ नियुक्त किया गया। अब प्रत्यक्षदर्शी फैजल के दावों से आया नया मोड़ रविवार को गोकुलपुर निवासी मोहम्मद फैजल के सामने आने से मामले में नया मोड़ आ गया। फैजल ने दावा किया कि वह 19 अगस्त को दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव के साथ एसएसपी कार्यालय गया था और घटना के दौरान बाहर ही मौजूद था। फैजल के मुताबिक, कांवड़ यात्रा के बाद तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडे ने मोहित जाटव को फोन कर मिलने के लिए बुलाया था। बाद में दोबारा फोन कर 19 अगस्त को आने के लिए कहा गया। उस समय तीनों लखनऊ में थे। वे 18 अगस्त को वहां से निकले और 19 अगस्त की सुबह करीब तीन बजे मेरठ पहुंचे। सफेद स्कॉर्पियो से पहुंचे थे एसएसपी कार्यालय फैजल ने बताया कि 19 अगस्त की सुबह करीब 11 बजे तीनों सफेद स्कॉर्पियो से एसएसपी कार्यालय पहुंचे। तत्कालीन एसएसपी उस समय कार्यालय में नहीं थे। कुछ देर बाद उनके पहुंचने पर पर्ची बनाकर दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव को अंदर भेजा गया, जबकि फैजल वेटिंग हॉल में बैठ गया। फैजल का दावा है कि दोनों के अंदर जाने के करीब पांच से सात मिनट बाद वहां तेज आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देने लगीं। उसके मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने गेट को कवर कर लिया था। करीब 40 मिनट तक अंदर से शोर और चीख-पुकार सुनाई देती रही। चेहरे पर कपड़ा बांधकर बाहर लाने का दावा फैजल के अनुसार, दोपहर करीब 12:30 से 12:40 बजे के बीच वहां सफेद रंग की बोलेरो और सिविल लाइन थाने की जीप पहुंची। इसके बाद दोनों नेताओं को चेहरे पर कपड़ा बांधकर बाहर लाया गया। उन्हें बोलेरो में बैठाकर वहां से ले जाया गया। फैजल का कहना है कि बाद में दोनों की तलाश शुरू हुई तो पता नहीं चल पा रहा था कि उन्हें कहां ले जाया गया। रात में जानकारी मिली कि दोनों सिविल लाइन थाने में हैं। इसके बाद सपा विधायक अतुल प्रधान उन्हें थाने से अपने साथ ले गए। स्कूटी से गिरने की पुलिस की कहानी पर उठाए सवाल फैजल ने दोनों नेताओं के स्कूटी से गिरकर घायल होने की पुलिस की कथित कहानी पर भी सवाल उठाए। उसने दावा किया कि तीनों स्कॉर्पियो से एसएसपी कार्यालय पहुंचे थे। उसके मुताबिक, जिस स्कॉर्पियो से वे गए थे, उसे बाद में मोहित जाटव के भाई ने घर से इमरजेंसी चाबी लाकर वहां से हटाया था। फैजल का दावा है कि गाड़ी की मूल चाबी मोहित जाटव के पास थी, जिसे पुलिस ने कथित तौर पर अपने कब्जे में ले लिया था। बोले- अंदर की मारपीट नहीं देखी, लेकिन चीख-पुकार सुनी फैजल ने कहा कि वह घटना के दौरान एसएसपी कार्यालय में मौजूद था। उसने दोनों नेताओं को अंदर जाते और बाद में चेहरे ढके हुए बाहर लाए जाते देखा। हालांकि, उसने स्पष्ट किया कि अंदर हुई कथित मारपीट उसने अपनी आंखों से नहीं देखी, लेकिन करीब 40 मिनट तक बाहर रहते हुए अंदर से आती आवाजें और चीख-पुकार सुनीं। फैजल ने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए। अगर किसी मामले में कानून का उल्लंघन हुआ है तो कार्रवाई सभी के खिलाफ होनी चाहिए। उसका सवाल है कि आम व्यक्ति के मामले में पुलिस जांच से पहले गिरफ्तारी तक कर लेती है, तो पुलिसकर्मियों के मामले में अलग मापदंड क्यों अपनाया जा रहा है।
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मेरठ थर्ड डिग्री मामले में नया मोड़:प्रत्यक्षदर्शी बोले- SSP ऑफिस में 40 मिनट तक सुनी चीख-पुकार, चेहरे ढककर बाहर लाए गए किसान नेता