20 करोड़ की ई-टेंडरिंग पर कसा शिकंजा:शासन ने जिला पंचायत एएमए से मांगा स्पष्टीकरण


पीलीभीत जिला पंचायत में करीब 20 करोड़ रुपये की ई-टेंडरिंग को लेकर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। पंचायती राज विभाग ने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी (एएमए) धर्मेंद्र कुमार से सुसंगत अभिलेखों के साथ स्पष्टीकरण मांगा है। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के निर्माण कार्यों की निविदाएं ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर कार्ययोजना अपलोड किए बिना ही आमंत्रित कर दी गईं। शासन के मुताबिक, 16वें वित्त आयोग योजना के तहत उस समय केंद्र सरकार से कोई ग्रांट आवंटित नहीं हुई थी और न ही राशि खर्च करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। ऐसे में बिना धनराशि आवंटित हुए और कार्ययोजना अपलोड किए करोड़ों रुपये की निविदाएं निकालने पर जिला पंचायत की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। पंचायती राज अनुभाग की ओर से जारी पत्र में एएमए से एक सप्ताह के भीतर दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ जवाब मांगा गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि तय समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सेवा नियमावली के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है। बिना कार्ययोजना अपलोड किए निकाली गईं निविदाएं शासन की जांच में सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में निर्माण कार्यों के लिए ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू की गई, जबकि संबंधित कार्ययोजना ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड नहीं की गई थी। इसके अलावा 16वें वित्त आयोग से धनराशि आवंटित होने का भी उल्लेख नहीं था। शासन ने इसी प्रक्रिया को नियमों के विपरीत मानते हुए एएमए धर्मेंद्र कुमार से जवाब मांगा है। अब उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि किन परिस्थितियों में करोड़ों रुपये के कार्यों की निविदाएं आमंत्रित की गईं। रायबरेली कार्यकाल की ऑडिट आपत्तियों पर भी नोटिस एएमए धर्मेंद्र कुमार के सामने कार्रवाई का यह अकेला मामला नहीं है। शासन ने उनके वर्ष 2022-23 और 2023-24 के रायबरेली कार्यकाल से जुड़ी ऑडिट आपत्तियों और कथित वित्तीय लापरवाही पर भी अलग से जवाब तलब किया है। इन मामलों में भी अभिलेखों के आधार पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। ऐसे में एएमए पर दो अलग-अलग प्रकरणों में कार्रवाई की तलवार लटक रही है। 25 करोड़ की ई-टेंडरिंग में भी जांच में दोषी पाए गए थे इससे पहले पीलीभीत जिला पंचायत में करीब 25 करोड़ रुपये की ई-टेंडरिंग के दौरान अवकाश पर गए अभियंता के डोंगल का इस्तेमाल कर टेंडर खोलने का मामला सामने आया था। जिलाधिकारी की जांच में एएमए धर्मेंद्र कुमार को इस मामले में दोषी पाया गया था। इसके अलावा 19 अगस्त को जिलाधिकारी द्वारा तलब किए जाने के बावजूद एएमए के अनुपस्थित रहने और औचक निरीक्षण के दौरान मौके पर न मिलने को लेकर भी सवाल उठे हैं। अब शासन की ओर से नए नोटिस के बाद जिला पंचायत की कार्यप्रणाली और एएमए की भूमिका पर निगरानी और बढ़ गई है।

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