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आउटसोर्सिंग कर्मियों को नहीं हटाया जाएगा
बरेली मंडल के सहायता प्राप्त और राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को अब हटाया नहीं जाएगा। 18 जुलाई से काम रोके जाने के बाद बुधवार को सैकड़ों कर्मचारियों ने कमिश्नर शंभू कुमार के सामने अपनी समस्या रखी। कमिश्नर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक को कर्मचारियों से यथावत काम लेने के निर्देश दिए। कमिश्नर से मिले कर्मचारी
उत्तर प्रदेश आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारी संघ के मंडल उपाध्यक्ष रवि प्रताप सिंह के नेतृत्व में मंडलभर से आए कर्मचारियों ने कमिश्नर को बताया कि वे कई वर्षों से माध्यमिक विद्यालयों में काम कर रहे हैं। इसके बावजूद कुछ विभागीय अधिकारियों ने उन्हें काम करने से रोक दिया है। इससे कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
कमिश्नर के निर्देश के बाद कर्मचारी संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय पहुंचे। यहां संयुक्त शिक्षा निदेशक से मुलाकात कर पूरा मामला बताया। कर्मचारियों ने कहा कि वर्षों से काम करने के बावजूद अचानक काम रोकना उनके लिए परेशानी खड़ी कर रहा है। 30 जून को खत्म हुआ था कंपनी का अनुबंध
संयुक्त शिक्षा निदेशक रामाज्ञ कुमार ने बताया कि आउटसोर्सिंग कंपनी ब्लू टाइगर का अनुबंध 30 जून को समाप्त हो गया था। टेंडर प्रक्रिया विभागीय स्तर पर चलती है। उन्होंने मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से बात कर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से यथावत काम लेने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद कर्मचारियों में राहत और खुशी है। 8200 रुपए वेतन, उसमें भी दूर की तैनाती
संघ के मंडल उपाध्यक्ष रवि प्रताप सिंह ने बताया कि कर्मचारियों को मैनपावर आउटसोर्सिंग कंपनी से करीब 8,200 रुपए मासिक वेतन मिलता है। उनका आरोप है कि इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी के साथ अन्य कटौतियां भी होती हैं। कई बार वेतन भी समय से नहीं मिलता। इससे कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी उठानी पड़ती है।
उन्होंने कहा कि शासनादेश में विद्यालय के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों को नौकरी में वरीयता देने की बात है, लेकिन कंपनी इस व्यवस्था का पालन नहीं करती। कर्मचारियों को 30 से 50 किलोमीटर दूर तक तैनाती दी जाती है। ऐसे में कम वेतन का बड़ा हिस्सा आने-जाने में खर्च हो जाता है। EPF और बीमा कटौती, कार्ड तक नहीं
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियां वेतन से ईपीएफ और बीमा की रकम काटती हैं, लेकिन कई कर्मचारियों को इससे संबंधित नंबर या कार्ड तक उपलब्ध नहीं कराए जाते। इसके अलावा शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर उत्पीड़न और मनमानी करने के आरोप भी लगाए गए। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 2 सितंबर 2025 की कैबिनेट बैठक में आउटसोर्सिंग निगम के गठन का प्रस्ताव मंजूर किया था। 20 सितंबर 2025 को शासनादेश भी जारी हुआ, लेकिन निगम अभी तक अस्तित्व में आकर काम शुरू नहीं कर सका है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे आउटसोर्सिंग व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। इस दौरान प्रदीप कुमार, देवेंद्र प्रताप, राहुल सिंह, अरुण कुमार, अनिल चौहान, संदीप गुप्ता, अर्चना कुमारी, हरीश कुमार, देशराज, शिवम पाल, रविंद्र कुमार समेत बड़ी संख्या में आउटसोर्सिंग कर्मचारी मौजूद रहे।
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आउटसोर्सिंग कर्मियों को नहीं हटाया जाएगा:कमिश्नर के निर्देश पर संयुक्त शिक्षा निदेशक ने डीआईओएस को दिए यथावत काम लेने के निर्देश