हाईटेक चीन में ‘मान्यताओं’ से तय होते करोड़ों के प्रोजेक्ट:सरकारी से लेकर सैन्य अफसर तक परंपराओं में उलझे; सैकड़ों, हाईवे-पुल प्रभावित


चीन की युआनयांग में नए औद्योगिक पार्क और उससे जुड़ने वाले फोर-लेन हाईवे की योजना मंजूर हो चुकी थी। इंजीनियर नक्शे व बजट को अंतिम रूप दे चुके थे, पर शिलान्यास से पहले ताओवादी फेंग शुई मास्टर ने दावा किया कि प्रस्तावित मार्ग की उत्तर-पूर्व दिशा ली वेई की जन्मतिथि के अनुसार अशुभ है और इससे करिअर प्रभावित हो सकता है। इसके बाद वेई ने हाईवे का रूट बदलवा दिया। इसके लिए अतिरिक्त जमीन लेनी पड़ी। प्रोजेक्ट 14 महीने लेट हुआ और 21 करोड़ रुपए लागत बढ़ गई। इसी तरह जियांग्शी प्रांत में पुल का निर्माण 20% हो चुका था। इसी दौरान अधिकारी झेंग गुआंगझोउ ने फेंग शुई सलाहकार से परामर्श लिया। सलाहकार ने दावा किया कि पुल का पिलर क्षेत्र की कथित ‘ड्रैगन वेंस’ (प्राकृतिक ऊर्जा) को काट रहा है, जिससे झेंग को जेल हो सकती है। उन्होंने निर्माण रुकवा दिया और पिलर 50 मीटर आगे बढ़वा दिया। पहले से बने पिलर भी तोड़ने पड़े। प्रोजेक्ट दो साल तक अटका रहा और 29 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। चीन में फेंग शुई और कई मान्यताएं सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई प्रशासनिक फैसलों और ​प्रोजेक्ट को भी प्रभावित कर रही है। दिलचस्प यह है कि इन मान्यताओं का खुलकर विरोध करने वाली ‘कम्युनिस्ट पार्टी’ के अफसर और मेयर ही इनके घोर समर्थक बने हुए हैं। ​वॉल स्ट्रीट की रिपोर्ट के अनुसार इन मान्यताओं के कारण बीते एक दशक में सैकड़ों हाईवे, पुल व औद्योगिक पार्क प्रभावित हुए। नक्शे बदलने व तोड़-फोड़ से प्रोजेक्ट्स 3 से 4 साल लेट हुए। एक ही मामले में 23 में से 16 बड़े प्रोजेक्ट बीच में ही रद्द या ठप कर दिए गए। सेना को ऑडिट कराना पड़ा – चीन की सबसे संवेदनशील रॉकेट फोर्स और रक्षा तंत्र में हुई बड़ी कार्रवाई के पीछे भ्रष्टाचार के अलावा इन पारंपरिक मान्यताओं को भी बड़ी वजह बताया गया। जांच में पता चला कि कुछ वरिष्ठ अधिकारी आधुनिक सैन्य जरूरतों के बजाय ताओवादी भविष्यवाणियों (ताओ धर्म की विद्या के आधार पर अनुमान) प्राचीन ग्रंथों और गणनाओं के आधार पर फैसले ले रहे थे। इनके चलते कई रक्षा प्रोजेक्ट्स व रणनीतिक ढांचों की मंजूरी में महीनों की देरी हुई। हालात इतने गंभीर हो गए कि 2023-24 में चीन को रक्षा बजट और प्रमुख प्रोजेक्ट्स का ऑडिट कराना पड़ा। ‘अशुभ दिशा’ मानकर निवेश कम, जीडीपी औसतन 2.3% कम बोस्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 2000 से 2018 के बीच 300 चीनी मेयरों की जन्मतिथियों व उनकी कथित ‘अशुभ’ दिशाओं की स्टडी की। ताकि पता चल सके कि वे जन्मतिथि व मान्यताओं के आधार पर किस तरह फैसले लेते हैं। नतीजे चौंकाने वाले थे। जिन क्षेत्रों को मेयर अशुभ दिशा में मानते थे, वहां कम निवेश करते थे। इसका असर अर्थव्यवस्था पर पड़ा और उन जिलों की जीडीपी औसतन 2.3% कम रही। रोजगार व निजी निवेश भी घटे। इससे चीन को हर साल कुल जीडीपी का 0.1% का घाटा हुआ। दस साल में यह नुकसान 15 लाख करोड़ रु. रहा।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *