Manimahesh yatra | lucky draw

भरमौर से मणिमहेश तक हेली टैक्सी में उड़ान भर सकेंगे श्रद्धालु।

हिमाचल प्रदेश के चंबा में होने वाली मणिमहेश यात्रा में श्रद्धालुओं को इस बार महज 100 रुपए में हेली टैक्सी से भगवान भोले के धाम पहुंचने का मौका मिलेगा। रेड क्रॉस सोसायटी ने पहली बार श्रद्धालुओं के लिए लकी ड्रॉ निकालने का फैसला लिया है। इसकी पर्ची मंगल

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इसके तहत हर सप्ताह लकी ड्रॉ निकाला जाएगा। इसमें चयनित श्रद्धालु को भरमौर से मणिमहेश और वापस भरमौर तक हेली टैक्सी से यात्रा करने का अवसर मिलेगा। रेड क्रॉस सोसायटी के मुताबिक, पहले सप्ताह एक श्रद्धालु का लकी ड्रॉ निकाला जाएगा।

यदि लकी ड्रॉ के लिए पर्चियां खरीदने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में इजाफा होता है, तो दूसरे सप्ताह से दो-दो श्रद्धालुओं का चयन किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को मणिमहेश यात्रा में हेली टैक्सी सेवा का लाभ दिलाना है।

मणिमहेश यात्रा की शुरुआत 25 अगस्त से होगी, जो 19 सितंबर तक चलेगी। हर साल हिमाचल के अलावा पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मणिमहेश पहुंचते हैं।

मणिमहेश की पवित्र डल डील में स्नान करते हुए श्रद्धालु। -फाइल फोटो।

मणिमहेश की पवित्र डल डील में स्नान करते हुए श्रद्धालु। -फाइल फोटो।

फुल किराया 6255, लक्की ड्रॉ से 100

खास बात यह है कि लकी ड्रॉ में चयनित श्रद्धालु को हेली टैक्सी के लिए महज 100 रुपए खर्च करने होंगे, जबकि भरमौर से मणिमहेश तक हेली टैक्सी में आने जाने का पूरा किराया करीब ₹6,255 है। ऐसे में लकी ड्रॉ में शामिल होने वाले श्रद्धालु को बेहद कम राशि में हवाई यात्रा का अवसर मिलेगा।

मणिमहेश झील समुद्र तल से 13385.83 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कठिन पहाड़ी रास्ते के बावजूद श्रद्धालु भगवान भोले के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। इस बार रेड क्रॉस सोसायटी की लकी ड्रॉ योजना से श्रद्धालुओं को हेली टैक्सी के जरिए मणिमहेश पहुंचने का एक अनोखा और सस्ता अवसर मिलने जा रहा है।

ऐसे मिलेगी लकी ड्रॉ की पर्ची

इस लकी ड्रॉ के लिए पर्ची की बिक्री आज (11 अगस्त) से शुरू हो गई। प्रत्येक पर्ची की कीमत 100 रुपए निर्धारित की गई है। इच्छुक श्रद्धालु और आमजन एसडीएम कार्यालय भरमौर तथा तहसील कार्यालय होली से टिकट खरीद सकते हैं। जल्द ही क्यूआर कोड के माध्यम से ऑनलाइन पर्ची भी उपलब्ध होंगे। क्यूआर कोड जल्द भरमौर प्रशासन की वेबसाइट पर शेयर किया जाएगा।

भरमौर के SDM अजय कुमार सिंह ने बताया कि मणिमहेश यात्रा लगभग एक माह तक चलेगी। इस अवधि के दौरान प्रत्येक सप्ताह एक लकी ड्रॉ निकाला जाएगा। चयनित विजेता को भरमौर से मणिमहेश तक हेली टैक्सी से यात्रा करने का विशेष अवसर मिलेगा।

भरमौर के ADM विकास शर्मा ने आमजन और श्रद्धालुओं से इस रेड क्रॉस लकी ड्रॉ में अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह पहल रेड क्रॉस की गतिविधियों को सहयोग देने के साथ-साथ श्रद्धालुओं को मणिमहेश यात्रा के दौरान एक अनूठा अनुभव प्रदान करेगी।

भरमौर से गौरीकुंड तक उड़ेगी हेली टैक्सी

मणिमहेश यात्रा के दौरान हेली टैक्सी भरमौर से गौरीकुंड तक उड़ती है। यहां से डेढ़ किलोमीटर पैदल या घोड़ों पर मणिमहेश जाना पड़ता है। भरमौर से गौरीकुंड की दूरी 13 किलोमीटर है। आस्था के चलते ज्यादातर श्रद्धालु मणिमहेश के लिए पैदल पहुंचते हैं।

मणिमहेश की पावडल डल झील जिसमे हर साल 8 से 10 लाख श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। -फाइल फोटो।

मणिमहेश की पावडल डल झील जिसमे हर साल 8 से 10 लाख श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं। -फाइल फोटो।

उत्तर भारत की कठिन धार्मिक यात्रा

मणिमहेश यात्रा को उत्तर भारत की कठिन धार्मिक यात्रा माना जाता है। मणिमहेश पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को ऊंचे-ऊंचे पहाड़ चढ़ने पड़ते हैं। यह यात्रा अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सुंदर दृश्यों के लिए भी जानी जाती है, क्योंकि इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को घने जंगलों, अल्पाइन घास के मैदानों और चट्‌टानों के बीच से होकर गुजरना पड़ता है।

इस दौरान हिमालय का मनमोहक दृश्य भी देखने को मिलता हैं। यही वजह है कि यह आध्यात्मिक यात्रा रोमांच और प्राकृतिक सुंदरता का भी आभास कराती है।

मणिमहेश कैलाश पर्वत जिसे महादेव का निवास माना जाता है। -फाइल फोटो।

मणिमहेश कैलाश पर्वत जिसे महादेव का निवास माना जाता है। -फाइल फोटो।

यहां बनाए गए कैंप? प्रशासन ने मणिमहेश यात्रा के लिए भरमौर, हड़सर, धनछो, सुंदरासी और गौरीकुंड में 5 जगह कैंप स्थापित किए है। इन कैंप में मेडिकल टीमें तैनात रहेगी। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के खाने-पीने के लिए लंगर और जगह जगह रहने के लिए टैंट की व्यवस्था की गई है।

कैलाश शिखर में शिव का निवास

ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव मणिमहेश के कैलाश शिखर पर निवास करते हैं, जो झील से दिखाई देता है। यह यात्रा हर साल, आमतौर पर अगस्त या सितंबर के महीने में हिंदू त्यौहार जन्माष्टमी के अवसर पर होती है। ​माना जाता है कि यह यात्रा 9वीं शताब्दी में शुरू हुई थी, जब एक स्थानीय राजा, राजा साहिल वर्मन को भगवान शिव के दर्शन हुए थे। जिन्होंने मणिमहेश झील पर एक मंदिर स्थापित करने का निर्देश दिया।

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