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सुल्तानपुर में सावन के दूसरे सोमवार को शिव मंदिरों में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित बेलवाई शिव धाम में 40 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, जबकि लंभुआ के जनवारीनाथ धाम में भी हजारों शिवभक्तों ने जलाभिषेक किया। बेलवाई शिव धाम में श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, दूध, धतूरा, भांग और जल चढ़ाकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की। मान्यता है कि सावन मास में यहां जलाभिषेक करने से विशेष लाभ मिलता है। यह मंदिर सुल्तानपुर, जौनपुर, आजमगढ़ और अंबेडकर नगर सहित चार जिलों की सीमा पर स्थित होने के कारण इन सभी जिलों से बड़ी संख्या में भक्त यहां इकट्ठे हुए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा। इसी तरह, लंभुआ स्थित जनवारीनाथ धाम में भी हजारों शिवभक्तों की भीड़ उमड़ी। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि भगवान भोलेनाथ यहां स्वयंभू प्रकट हुए थे। त्रेता युग से जुड़े इस मंदिर का संबंध भगवान राम से भी बताया जाता है, जिन्होंने धोपाप स्थित गोमती नदी में स्नान के बाद यहां पूजा की थी। यह मंदिर सुल्तानपुर के अलावा अमेठी, रायबरेली, प्रतापगढ़, अयोध्या और जौनपुर में भी प्रसिद्ध है। जनवारीनाथ धाम में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए लंभुआ पुलिस ने कमान संभाली। मंदिर से लगभग 400 मीटर पहले बैरियर लगाकर वाहनों को रोक दिया गया, जिससे मंदिर क्षेत्र में यातायात सुचारु बना रहे। सावन के अंतिम दिन तीर्थराज धोपाप से जल लेकर हजारों कांवड़िए यहां पहुंचते हैं और जलाभिषेक के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। कूरेभार कस्बे के स्टेशन मार्ग स्थित प्राचीन शिव मंदिर, बीआरसी कार्यालय के समीप शिवालय, गीता मंदिर के निकट स्थित शिव मंदिर और हनुमान गांव सहित ग्रामीण अंचलों के दर्जनों शिवालयों में भी सुबह से ही पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा। श्रद्धालुओं के अनुसार, सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है। जयसिंहपुर के प्राचीन शिव मंदिर में भी जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मी व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात रहे। इस दौरान ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा।
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सावन के दूसरे सोमवार पर शिवभक्तों का जनसैलाब:बेलवाई और जनवारीनाथ धाम में कई जिलों से पहुंचे श्रद्धालु