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सिद्धार्थनगर के वरिष्ठ चिकित्सक, साहित्यकार और समाजसेवी डॉ. सच्चिदानंद मिश्र का सोमवार सुबह 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे दशकों तक चिकित्सा सेवा से जुड़े रहे और अंतिम समय तक मरीजों का उपचार करते रहे। डॉ. सच्चिदानंद मिश्र जिले के सबसे वरिष्ठ चिकित्सकों में से एक थे। बढ़ती उम्र के बावजूद वे नियमित रूप से मरीजों को देखते थे। प्रतिदिन एक घंटे तक नि:शुल्क मरीजों का उपचार करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उनका मानना था कि चिकित्सा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे बड़ा माध्यम है। चिकित्सा के साथ-साथ डॉ. मिश्र का साहित्य से भी गहरा जुड़ाव था। उनकी चर्चित पुस्तक ‘ईश्वर मर चुका’ ने उन्हें एक गंभीर चिंतक और साहित्यकार के रूप में पहचान दिलाई। सामाजिक सरोकारों और मानवीय मूल्यों पर उनके विचार अक्सर चर्चा का विषय रहते थे। डॉ. सच्चिदानंद मिश्र के निधन पर जिले के चिकित्सा, साहित्य और सामाजिक जगत में शोक व्यक्त किया गया है। चिकित्सकों, साहित्यकारों, सामाजिक संगठनों और उनके शुभचिंतकों ने गहरा दुख प्रकट किया। उन्होंने अपने पूरे जीवन में सेवा, सादगी और समर्पण की मिसाल कायम की। जिले के लोग उन्हें एक ऐसे चिकित्सक के रूप में याद रखेंगे, जिन्होंने जीवन के अंतिम पड़ाव तक मरीजों की सेवा को अपना धर्म माना।
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सिद्धार्थनगर में साहित्यकार डॉ. सच्चिदानंद मिश्र का निधन:95 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, जिले के सबसे वरिष्ठ डॉक्टरों में से एक थे