लखनऊ में नवसृजन संस्था का 18वां वार्षिकोत्सव:दो कृतियों का विमोचन , 50 से अधिक साहित्यकार सम्मानित


नवसृजन साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था का 18वां वार्षिकोत्सव और सम्मान समारोह लखनऊ में आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम हजरतगंज स्थित उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में संपन्न हुआ, जिसमें साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े रचनाकारों एवं कलाकारों ने भाग लिया। समारोह के दौरान दो साहित्यिक कृतियों का विमोचन किया गया। इनमें डॉ. योगेश, मंजू सक्सेना और देवेश द्विवेदी ‘देवेश’ द्वारा संपादित साझा काव्य संग्रह ‘जब वसंत के फूल खिलेंगे…’ शामिल है। मंजू सक्सेना का दोहा संग्रह ‘दोहा मंजूषा’ भी लोकार्पित किया गया। वक्ताओं ने दोनों कृतियों की साहित्यिक उपयोगिता और रचनात्मकता की सराहना की। इन साहित्यकारों को सम्मानित किया गया साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मिथिलेश दीक्षित को वरिष्ठ रचनाकार सम्मान-2026 से सम्मानित किया गया। रवीश पाण्डेय को युवा रचनाकार सम्मान-2026 प्रदान किया गया। इसके अलावा , अनिल मिश्र को डॉ. रंगनाथ मिश्र स्मृति सम्मान-2026 दिया गया। महेश चन्द्र द्विवेदी को प्रो. डॉ. विष्णु गिरि गोस्वामी स्मृति सम्मान-2026 से नवाजा गया। कार्यक्रम में 50 से अधिक वरिष्ठ, युवा और नवोदित साहित्यकारों को नवसृजन वाङ्मय विभूषण सम्मान और नवसृजन काव्यामृत सम्मान-पत्र भी प्रदान किए गए। सभी सम्मानित व्यक्तियों को अंगवस्त्र और प्रतीक चिह्न भेंट किए गए। नन्ही कलम अक्षिता द्विवेदी ‘तेजू’ और नवोदित कथक नृत्यांगना अदिति गुप्ता को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। नवसृजन की विकास यात्रा की जानकारी दी समारोह की शुरुआत अदिति गुप्ता के कथक नृत्य और कुमार तरल की वाणी वंदना से हुई, जिसने उपस्थित दर्शकों को प्रभावित किया। कार्यक्रम का संचालन संस्था अध्यक्ष डॉ. योगेश ने किया, जबकि महासचिव देवेश द्विवेदी ‘देवेश’ ने अतिथियों का स्वागत किया। उपाध्यक्ष मंजू सक्सेना ने नवसृजन की विकास यात्रा और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। इस समारोह को सफल बनाने में मनमोहन बाराकोटी, प्रेम शंकर शास्त्री ‘बेताब’, मनु बाजपेयी, विशाल मिश्र, राजेश कुमार श्रीवास्तव और पूजा श्रीवास्तव का विशेष सहयोग रहा।

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