6 मिनट पहले
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है।
दुनियाभर की मीडिया इस घटना को प्रमुखता से कवर कर रही है। न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्डियन, बीबीसी समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इसे टॉप स्टोरीज में जगह दी है।
पढ़िए, किस विदेशी मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में क्या लिखा…
BBC: मोदी सरकार ने छात्रों के गुस्से का सही अंदाजा नहीं लगाया
2014 में सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी सरकार आम तौर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाती रही है और शायद ही कभी किसी बड़े आंदोलन के आगे झुकी हो।
इससे पहले सरकार ने केवल एक बड़े मामले में अपना फैसला वापस लिया था, जब करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना पड़ा था।
इस बार सरकार ने छात्र आंदोलन को लेकर हो रही नाराजगी और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता का सही आकलन नहीं किया। शुरुआत में कई हफ्तों तक आंदोलन को नजरअंदाज किया गया, लेकिन इस सप्ताह संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख्ती के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया।
धर्मेंद्र प्रधान जैसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री वास्तव में इस्तीफा देंगे या नहीं, इसे लेकर आखिरी समय तक कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों, खासकर पहली बार किसी बड़े प्रदर्शन का हिस्सा बने युवाओं, को अपनी जीत का एहसास हो रहा है।
द गार्डियन: मोदी के सबसे करीबी मंत्रियों में से एक प्रधान का इस्तीफा
भाजपा के 12 वर्षों के शासन में यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद मंत्रियों में से एक को सार्वजनिक दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। इनका नेतृत्व नए बने युवा राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया। इस सप्ताह यह आंदोलन देशभर में युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही दिल्ली में जुटे हजारों सीजेपी समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया और इसे सरकार से जवाबदेही की अपनी मांग की बड़ी जीत बताया।
न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकियों की बी-टीम’ कहा था, अब इस्तीफा

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इसे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है। यह आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था। इस आंदोलन की अगुआई खुद को कॉकरोच कहने वाले छात्र समूह कर रहे थे। यह नाम भारत के चीफ जस्टिस की कथित अपमानजनक टिप्पणी से प्रेरित था।
यह संगठन ने शुरुआत से ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा मांग रही थी। इस महीने प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग ने इस आंदोलन को भारत के कई शहरों तक फैला दिया।
धर्मेंद्र प्रधान पहले इन प्रदर्शनों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों पर छात्रों का इस्तेमाल कर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया था। जून में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ तक कह दिया था।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे आंदोलन को और बल मिल सकता है और छात्र अपनी अन्य मांगों को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं।
अल-जजीरा: छात्र आंदोलन की बड़ी जीत हुई

छात्रों के आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसे देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है।
हाल के वर्षों में यह आंदोलन मोदी सरकार के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है। इस आंदोलन ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर युवाओं के बढ़ते गुस्से को भी सामने ला दिया है।
CNN- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, सीजेपी ने कहा- ‘लड़ाई अभी बाकी है’
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की। इसे देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है। मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के कथित पेपर लीक और उनकी बिक्री के आरोपों के बाद छात्र सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे थे।
धर्मेंद्र प्रधान ने बढ़ते जनदबाव के बीच इस्तीफा देने का फैसला किया। पिछले कुछ दिनों में हजारों छात्र और उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए थे और उनकी बर्खास्तगी के साथ-साथ देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक सार्वजनिक रूप से उनके इस्तीफे को स्वीकार करने की घोषणा नहीं की है।
