उन्नाव में फिर बढ़ने लगा गंगा का जलस्तर:नरौना बांध से 48 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया, आसपास के लोगों को बाढ़ का डर


उन्नाव में गंगा नदी का जलस्तर 10 दिन तक घटने के बाद शनिवार को फिर तेजी से बढ़ने लगा। सुबह से शाम तक जारी इस बढ़ोतरी ने आसपास रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है। बाढ़ की आशंका को लेकर ग्रामीणों में बेचैनी है। नरौना बांध से 48 हजार 848 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जुलाई के पहले सप्ताह में लगातार बारिश के कारण गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा था और नदी चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ रही थी। मैदानी क्षेत्रों में बारिश रुकने के बाद जलस्तर में गिरावट आई थी, जिससे तटवर्ती गांवों के लोगों को राहत मिली थी। हालांकि, अब पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधार बारिश का असर गंगा के जलस्तर पर दिखने लगा है। ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण नदियों में पानी का दबाव बढ़ गया है, जिसके चलते बांधों से लगातार पानी छोड़ा जा रहा है। कानपुर स्थित गंगा बैराज में पानी की अधिकता के कारण शुक्रवार को सभी गेट खोल दिए गए, जिसका सीधा असर उन्नाव में गंगा के जलस्तर पर पड़ा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, शुक्रवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 109.75 मीटर दर्ज किया गया था। यह दोपहर 12 बजे बढ़कर 109.80 मीटर, तीन बजे 109.99 मीटर और शाम छह बजे तक 110.05 मीटर पर पहुंच गया। शनिवार सुबह आठ बजे जलस्तर घटकर 109.750 मीटर हुआ, लेकिन दोपहर 12 बजे यह फिर बढ़कर 109.800 मीटर दर्ज किया गया। गंगा के जलस्तर में इस अचानक वृद्धि से शुक्लागंज, परियर, नानामऊ और बक्सर जैसे तटवर्ती क्षेत्रों के निवासियों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण लगातार नदी की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। प्रशासन भी स्थिति पर बारीकी से निगरानी कर रहा है और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के अधिकारियों का कहना है कि ऊपरी क्षेत्रों से छोड़े जा रहे पानी के कारण जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का सिलसिला जारी रहा और बांधों से पानी छोड़ा जाता रहा तो आने वाले दिनों में जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में तटीय क्षेत्रों के लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

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