बलिया में सुभासपा ने DM को सौंपा ज्ञापन:सभी जातियों के सम्मान और जातिसूचक टिप्पणियों पर कार्रवाई की मांग


सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे बलिया जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिलाधिकारी (डीएम) को मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में सुभासपा ने आरोप लगाया कि समाज के पिछड़े, अतिपिछड़े, दलित और अतिदलित वर्गों के सम्मान, अधिकार और सामाजिक न्याय के लिए संघर्ष करने वाले लोगों के खिलाफ कुछ राजनीतिक नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा लगातार जातिसूचक, अपमानजनक और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। पार्टी ने विशेष रूप से समाजवादी पार्टी के कुछ सांसदों, नेताओं और उनके समर्थकों पर आरोप लगाया। ज्ञापन में कहा गया कि सपा के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर पिछड़े, अतिपिछड़े, दलित और अतिदलित समाज के लोगों के प्रति कथित रूप से जातिसूचक और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया जा रहा है। इसी क्रम में, शिवपाल यादव द्वारा भी सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे इन वर्गों के लोगों को ‘छोटी जाति’ और ‘नीच जाति’ जैसे आपत्तिजनक शब्दों से संबोधित करने की कथित टिप्पणियां सामने आई हैं। इन टिप्पणियों से समाज के वंचित वर्गों में गहरी पीड़ा और आक्रोश है। सुभासपा ने कहा कि समाजवादी पार्टी की यह मानसिकता संविधान की मूल भावना, समानता, सामाजिक न्याय और सम्मान के सिद्धांतों के विरुद्ध है। किसी भी व्यक्ति या वर्ग को उसकी जाति के आधार पर अपमानित करना या सामाजिक रूप से हतोत्साहित करना लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक व्यवस्था के लिए अत्यंत चिंताजनक और संविधान के नियमों का उल्लंघन है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की जिला इकाई ने मांग की है कि पिछड़े, अतिपिछड़े, दलित और अतिदलित समाज के विरुद्ध जातिसूचक, अपमानजनक और भेदभावपूर्ण टिप्पणी करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ निष्पक्ष जांच कराकर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि ऐसे दलों के नेताओं, सांसदों, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा की जाने वाली जातिसूचक एवं आपत्तिजनक टिप्पणियों का संज्ञान लेकर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, गरीब, कमजोर और वंचित वर्गों को धमकाने, प्रताड़ित करने, उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने या किसी भी प्रकार का उत्पीड़न करने वालों के विरुद्ध तत्काल निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर जातिसूचक, अभद्र और अपमानजनक टिप्पणी द्वारा समाज में वैमनस्यता फैलाने वालों के विरुद्ध साइबर कानून एवं अन्य प्रचलित कानूनों के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई की जाए। राजनीतिक प्रभाव,पद या दबाव के कारण किसी भी पीड़ित व्यक्ति की शिकायत को दबाया अथवा प्रभावित न किया जाए तथा प्रत्येक शिकायत की निष्पक्षता से जांच सुनिश्चित की जाए।समाज के पिछड़े,अतिपिछड़े, दलित एवं अतिदलित वर्गों के स्वाभिमान सम्मान, सुरक्षा एवं संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए विशेष निगरानी हेतु प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली जातिवादी मानसिकता एवं अपमानजनक भाषा के विरुद्ध प्रशासन द्वारा व्यापक गाइडलाइन एवं अवेयरनेस प्रोग्राम चलाया जाय।

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