प्रयागराज में पेपर लीक पर छात्रों का मशाल जुलूस:जंतर-मंतर आंदोलन के समर्थन में शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग


प्रयागराज में देर शाम छात्रों ने शुक्रवार को मशाल जुलूस निकाला। यह प्रदर्शन विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, अंबेडकर छात्रावास में जातिगत उत्पीड़न के आरोपों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों के विरोध में किया गया। छात्रों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, पेपर लीक पर रोक, नई शिक्षा नीति-2020 वापस लेने और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने की मांग की। यह जुलूस सलोरी स्थित अंबेडकर छात्रावास से बैंक रोड तक निकाला गया। जुलूस के बाद एक सभा का आयोजन किया गया, जिसमें छात्रों ने अपनी मांगों को दोहराया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने बताया कि यूपी लेखपाल, यूपीएसआई, टीजीटी, पीजीटी, नीट और असिस्टेंट प्रोफेसर जैसी कई भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं। उनका कहना था कि इन गड़बड़ियों से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। छात्रों ने अंबेडकर छात्रावास की अधीक्षिका पर जातिगत उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की। सभा को संबोधित करते हुए आइसा उत्तर प्रदेश के सचिव शशांक ने कहा कि प्रदेश में जातिगत घटनाएं और परीक्षा संबंधी अनियमितताएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कई प्रमुख परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के मामलों पर जवाबदेही तय करने में विफल रही है। शशांक ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई। छात्रनेता श्रीकांत अंबेडकर ने उच्च शिक्षा संस्थानों और छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव तथा शिक्षा क्षेत्र में लगातार फंड कटौती पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने सरकार से प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का आग्रह किया। आइसा इलाहाबाद की अध्यक्ष सोनाली ने बताया कि जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन के समर्थन में देशभर के छात्र एकजुट हो रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। राजनीतिक विज्ञान के शोध छात्र बृजेश ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं के नियमों में बार-बार बदलाव से अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से पारदर्शी परीक्षा प्रणाली लागू करने और युवाओं के हितों की रक्षा करने की मांग की।

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