आचार्य रामदेव लाल 'विभोर' की 90वीं जयंती मनाई गई:लखनऊ में काव्य कला संगम का विशेष साहित्यिक चर्चा, मिला 'आचार्य रामदेव लाल विभोर स्मृति सम्मान


लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में काव्य कला संगम ने आचार्य रामदेव लाल ‘विभोर’ की 90वीं जयंती पर एक विशेष साहित्यिक कार्यक्रम आयोजित किया। इस अवसर पर काव्य पाठ, उनके साहित्य पर चर्चा और साहित्यकारों का सम्मान किया गया। शहर के कई वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद और रचनाकार इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मृदुल शर्मा ने आचार्य रामदेव लाल ‘विभोर’ के साहित्यिक योगदान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि ‘विभोर’ की रचनाएं आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं और हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। समारोह में उनके साहित्यिक योगदान को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई। रचनाकारों को सम्मानित किया इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले रचनाकारों को ‘आचार्य रामदेव लाल विभोर स्मृति सम्मान-2026’ से सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में दयानंद जड़िया ‘अबोध’, गौरीशंकर वैश्य ‘शिव’, प्रेमलता त्रिपाठी, दिनेश चंद्र अवस्थी, शिवपाल सिंह ‘मंगल’ और अशोक कुमार श्रीवास्तव ‘देव’ शामिल थे। सभी को अंगवस्त्र और सम्मान-पत्र भेंट किए गए। ‘विभोर की लेखनी हिंदी साहित्य को नई पहचान दिलाई वक्ताओं ने आचार्य रामदेव लाल ‘विभोर’ के साहित्य को समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि उनकी लेखनी ने हिंदी साहित्य को नई पहचान दिलाई।समारोह की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने की। भाषा विज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. उषा सिन्हा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि हिंदी विभाग के पूर्व आचार्य प्रो. हरिशंकर मिश्र ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त किए।

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