मिल की राख में झुलसे दूसरे बच्चे की मौत:बिजनौर हादसे में 1 मई को झुलसा था, बर्थडे वाले दिन हुई मौत


बिजनौर शहर कोतवाली क्षेत्र के झालू रोड पर मिल की गर्म राख में झुलसने वाले पांच बच्चों में से 13 वर्षीय रिहान की सोमवार को देहरादून में उपचार के दौरान मौत हो गई। इस हादसे में यह दूसरी मौत है। इससे पहले 24 जून को 13 वर्षीय शाद ने मेरठ मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। वहीं गंभीर रूप से झुलसे साहिल और उजैद की हालत अब भी चिंताजनक बनी हुई है, जबकि बिलाल की स्थिति में काफी सुधार बताया जा रहा है। 1 मई को हुआ था हादसा यह दर्दनाक हादसा 1 मई को हुआ था। मोहल्ला लड़ापुरा के छह-सात बच्चे नूरपुर रोड स्थित चक्कर चौराहे के पास झालू रोड पर एक आम के बाग में आंधी से गिरे आम खाने गए थे। बाग के रखवाले द्वारा भगाए जाने पर बच्चे भागते हुए सड़क किनारे पड़े मिल की गर्म राख के ढेर तक पहुंच गए। उन्हें राख के अत्यधिक गर्म होने का अंदाजा नहीं था और देखते ही देखते पांच बच्चे उसमें फंसकर गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे में शाद (13) पुत्र दिलशाद, उज़ैद (12) पुत्र रशीद, रिहान (13) पुत्र इमरान, साहिल (12) पुत्र वसीम और बिलाल (12) पुत्र निसार गंभीर रूप से घायल हो गए। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और उन्हें अस्पताल पहुंचाया। प्रशासन ने जारी किए थे नोटिस घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने संबंधित मिल और बाग स्वामी को नोटिस जारी किए थे। सदर विधायक सूची चौधरी के पति एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता मौसम चौधरी ने अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की थी और प्रत्येक घायल बच्चे के उपचार के लिए 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की थी। आर्थिक तंगी के कारण प्रभावित हुआ इलाज पीड़ित परिवारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चों का लगातार किसी बड़े विशेषज्ञ अस्पताल में उपचार नहीं हो सका। परिजन अपनी क्षमता के अनुसार अलग-अलग अस्पतालों में इलाज कराते रहे। सबसे पहले शाद की हालत बिगड़ने पर उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां 24 जून को उसकी मौत हो गई। शाद की मौत के बाद रिहान, साहिल और उजैद की स्थिति को लेकर परिजनों की चिंता और बढ़ गई। प्रशासन ने शाद की मौत के तीन दिन बाद अन्य गंभीर रूप से झुलसे बच्चों को मेरठ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। हालांकि अपेक्षित सुधार नहीं होने पर रिहान के परिजन उसे एक जुलाई को बिजनौर ले आए। पहले जिला अस्पताल, फिर दिल्ली, उसके बाद ऋषिकेश और अंततः देहरादून में उसका इलाज कराया गया, जहां सोमवार सुबह करीब 10 बजे उसने अंतिम सांस ली। परिवार में पसरा मातम रिहान की मौत से परिवार में मातम छा गया है। वह चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर का था। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर बताई जा रही है। रिहान का शव सोमवार को घर पहुंचा, जहां असर की नमाज के बाद उसे सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। साहिल और उजैद की हालत गंभीर दूसरी ओर, साहिल और उज़ैद का उपचार अभी भी जारी है और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं बिलाल की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। वह अब सामान्य रूप से भोजन कर रहा है और चलने-फिरने में भी सक्षम बताया जा रहा है। पोस्टमार्टम कराने से परिजनों का इनकार रिहान का शव घर पहुंचने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पोस्टमार्टम की कार्रवाई शुरू करने का प्रयास किया। हालांकि परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से साफ इनकार कर दिया। शहर कोतवाल अवनीत मान ने बताया कि पुलिस परिजनों को पोस्टमार्टम कराने के लिए समझाने का प्रयास कर रही है, लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हैं। जन्मदिन पर ही हुई मौत इस हादसे का सबसे भावुक पहलू यह रहा कि जिस दिन रिहान का जन्मदिन था, उसी दिन उसकी मौत हो गई। जिस घर में जन्मदिन की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।

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