लखनऊ बार एसोसिएशन पूर्व अध्यक्ष इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में फैसला:24 साल पुराने चर्चित हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट 3 दोषियों को 7 जुलाई को सजा सुनाएगा


लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय इंद्रदेव सिंह की वर्ष 2002 में हुई चर्चित हत्या के मामले में सीबीआई मामलों की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा ने तीन आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अब सजा के बिंदु पर 7 जुलाई 2026 को सुनवाई होगी।
8 अगस्त 2002 को दिनदहाड़े हुई थी हत्या अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 अगस्त 2002 को शाम करीब 4 से 4:30 बजे के बीच कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पीछे बक्शी दीदी के घर के पास अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने थाना कैसरबाग में कई नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
राज्य सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपी गई थी जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। विवेचना के दौरान सीबीआई ने मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, छोटेलाल, छोटू, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना और पन्ना सिंह के नाम सामने लाए। जांच में यह भी सामने आया कि विक्रम यादव उर्फ कालिया ने 12 बोर के तमंचे से इंद्रदेव सिंह को गोली मारी थी।
22 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला सीबीआई ने वर्ष 2004 में आरोप पत्र दाखिल किया था और उसी वर्ष आरोप भी तय हुए थे। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी के तहत दोषी ठहराया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अन्य तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है।
7 जुलाई को तय होगी सजा अदालत ने तीनों दोषियों को जेल भेजते हुए सजा पर सुनवाई के लिए 7 जुलाई की तारीख तय की है। करीब 24 साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में आए फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *