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बलिया जिले का नौरंगा गांव, जिसकी आबादी लगभग 20 हजार है, इन दिनों चर्चा में है। गंगा नदी के अलावा यहां पहुंचने का कोई अन्य रास्ता नहीं है। ग्रामीण अब खुद ही गंगा की धारा मोड़ने के लिए अस्थाई बांध बनाने में जुट गए हैं, साथ ही सरकार से पक्के पुल के निर्माण की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में यहां एक पीपा पुल संचालित होता है, लेकिन कुछ समय बाद इसे हटा दिया जाता है। इसके बाद लगभग चार महीने तक गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क कट जाता है। इस दुर्गम स्थिति के कारण कोई अधिकारी भी यहां आना पसंद नहीं करता।
बैरिया तहसील के अंतर्गत आने वाले नौरंगा गांव के लोग बांस-बल्ली और बालू भरी बोरियों की मदद से गंगा की एक धारा को मोड़ने के लिए अस्थाई बांध का निर्माण कर रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि एक धारा उनके गांव की ओर जा रही थी, जिससे कटाव का खतरा था। इसे रोकने के लिए उन्होंने मिलकर यह पहल की है। ग्रामीण उमाशंकर ठाकुर ने बताया कि उनके गांव के पास 26 करोड़ रुपये का एक काम चल रहा है, जो नौरंगा से चक्की नौरंगा तक है। उन्होंने कहा, “सरकार हमारा सहयोग कर रही है, हम सरकार का सहयोग कर रहे हैं।” नन्हक ठाकुर ने जानकारी दी कि नौरंगा भुआल छपरा में गंगा की धारा से हो रहे कटाव के कारण वे यह बांध बना रहे हैं। बोरियां ठेकेदार द्वारा मिली हैं, जबकि बाकी काम चंदे के पैसे से हो रहा है। ग्रामीणों ने ‘मोदी योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए नौरंगा में पक्के पुल के निर्माण की पुरजोर मांग की। उनका कहना है कि यदि यहां पक्का पुल बन जाता है, तो कटाव की समस्या के साथ-साथ आवागमन की समस्या भी स्थायी रूप से दूर हो जाएगी। इस संबंध में बाढ़ विभाग के XEN संजय मिश्र ने बताया कि नौरंगा में बाढ़ बचाव की दो परियोजनाएं चल रही हैं। उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में आया है कि ग्रामीण अपने स्तर पर लगभग दो सौ मीटर पहले धारा मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। विभाग द्वारा बोरियों आदि का सहयोग किया गया है और आगे भी आवश्यकतानुसार मदद की जाएगी।
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बलिया में ग्रामीण खुद बना रहे गंगा पर अस्थाई बांध:नदी की धारा मोड़ने का प्रयास, पक्के पुल की मांग