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अयोध्या की एक अदालत ने 10 साल पुराने हत्या के प्रयास के मामले में गवाही के लिए बार-बार अनुपस्थित रहने पर कड़ा रुख अपनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सुरेंद्र मोहन सहाय ने बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर निरीक्षक संतोष कुमार यादव को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि निरीक्षक संतोष कुमार यादव को अगली सुनवाई की तिथि 18 मार्च को हर हाल में उपस्थित कराया जाए। अदालत ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि आदेश का पालन नहीं हुआ, तो आगे और कठोर कार्रवाई की जा सकती है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला लगभग 10 वर्ष पुराना है और थाना रौनाही क्षेत्र में दर्ज किया गया था। इसमें हत्या के प्रयास, छल-कपट और लूटे गए सामान की बरामदगी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। उस समय संतोष कुमार यादव थाना रौनाही में दरोगा के पद पर तैनात थे और उन्होंने ही इस मामले की विवेचना की थी। जांच पूरी होने के बाद आरोपी उमेश सिंह समेत कई अन्य के विरुद्ध आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान विवेचक की गवाही अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हालांकि, बार-बार समन जारी होने और समन सेल द्वारा व्यक्तिगत एवं दूरभाष पर सूचना दिए जाने के बावजूद उनकी अदालत में अनुपस्थिति न्यायिक प्रक्रिया में बाधा बन रही है। वर्तमान में निरीक्षक यादव बलरामपुर न्यायालय में सुरक्षा प्रभारी के पद पर तैनात हैं। न्यायालय के इस सख्त रुख से यह संकेत मिलता है कि लंबित मामलों को तेजी से निपटाने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए न्यायपालिका गंभीर है।
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अयोध्या कोर्ट का दरोगा को पेश करने का आदेश:10 साल पुराने हत्या के प्रयास मामले में गवाही से अनुपस्थित