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कानपुर के जाजमऊ वाजिदपुर स्थित गंगा में लाखों मछलियों की मौत के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया, डीएम ने जांच के लिए तीन सदस्यी कमेटी का गठन किया है। कमेटी ने रविवार को जहां पर मछलियों की मौत हुई थी, उसके आसपास 7 जगह पर गंगा जल का सैंपल लिया है। जांच टीम को गंगा में दूषित पानी गिरते मिला। यह कमेटी गंगा बैराज से लेकर जाजमऊ तक देखेगी कि आखिर कितनी जगह पर गंगा में सीधे दूषित पानी गिर रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ एक्शन होगा। सात जगह पर लिया गंगा का सैंपल, गंगा में गिरता मिला दूषित पानी एसडीएम सदर अनुभव सिंह ने बताया कि गंगा में प्रदूषण के चलते लाखों मछलियों की मौत का मामला सामने आया है। इसे लेकर डीएम जितेन्द्र प्रताप सिंह ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है। इस जांच कमेटी में मैं एसडीएम सदर, एडी मत्स्य विभाग और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर के रीजनल ऑफिसर शामिल हैं। जांच कमेटी आज रविवार को टीम के साथ जाजमऊ में जहां पर गंगा में मछलियों की मौत हुई थी वहां पर पहुंची। गंगा में कौन-कौन से नाले गिर रहे या सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी जा रहा है। गंगा में कहां-कहां से पानी गिरता है और मौजूदा समय में इसकी स्थिति क्या है। टीम ने मौके पर जाकर हकीकत को देखा और 7 जगह पर गंगा जल का सैंपल लिया है। गंगा में जो ट्रीटमेंट वाटर छोड़ा जा रहा है, उसकी हकीकत जानने के लिए उसका भी सैंपल लिया गया है। गंगा जल को अब जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी। यहां पर लिया गया गंगा जल का सैंपल अब आपको बताते हैं, क्या है पूरा मामला कानपुर के जाजमऊ स्थित गंगा नदी में अचानक लाखों की संख्या में मछलियों की मौत हो गई और मछलियां गंगा में उतराने लगी। मछलियों को लेने के लिए गंगा किनारे लोगों की भीड़ लग गई थी। क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि टेनरियों का दूषित जल सीधे गंगा में छोड़ा जा रहा है। इस वजह से गंगा में मछलियों की मौत हो रही है। इससे पहले यहां पर एक डॉल्फिन की भी मौत हो चुकी है। अफसरों की लापरवाही के चलते कानपुर में गंगा पूरी तरह से दूषित हो गई हैं। जबकि गंगा बैराज से पहले गंगा का पानी शुद्ध है। कानपुर में एंट्री करने के बाद ही गंगा पूरी तरह से दूषित हो जाती हैं। इसका असर प्रयागराज तक गंगा में देखने को मिलता है। रीजनल अफसर की लापरवाही आई सामने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कानपुर के रीजनल ऑफिसर अजीत कुमार सुमन की घोर लापरवाही सामने आई है। टेनरियों का दूषित पानी सीधे गंगा में गिर रहा है। इतना ही नहीं आधा दर्जन से अधिक छोटे-बड़े नाले भी सीधे गंगा में गिर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ गंगा का जल स्तर बहुत कम होने और केमिलक युक्त पानी पढ़ने से गंगा का पानी दूषित हो गया है। इसी के चलते कानपुर के पहले तो गंगा का पानी बेहद शुद्ध है, लेकिन कानपुर में प्रवेश करने के बाद ही गंगा बेहद गंभीर रूप से दूषित हो गई हैं। गंगा में टेनरी का पानी गिरने मछलियों की मौत सेवानिवृत्त प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आशुतोष पांडेय के अनुसार टेनरियों से निकलने वाले अपशिष्ट जल में क्रोमियम, सल्फाइड, अमोनियम और अन्य भारी धातुएं बड़ी मात्रा में पाई जाती हैं। इनमें विशेष रूप से हेक्सावेलेंट क्रोमियम बेहद जहरीला माना जाता है। यह मछलियों के गलफड़ों और आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाकर उनकी मृत्यु का कारण बनता है। इसके अलावा प्रदूषित पानी में बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) और केमिकल आक्सीजन डिमांड (सीओडी) बढ़ने से पानी में घुली आक्सीजन लगभग समाप्त हो जाती है। आक्सीजन का स्तर शून्य या अत्यंत कम होने पर मछलियां सांस नहीं ले पातीं और दम घुटने से मर जाती हैं। इसके साथ ही अत्यधिक टीडीएस, क्लोराइड और रासायनिक प्रदूषण पानी के पीएच स्तर को भी प्रभावित करता है, जिससे जलीय जीवों का जीवन संकट में पड़ जाता है। इन रसायनों का असर केवल मछलियों तक सीमित नहीं रहता। जहरीले तत्व उनके शरीर में जमा होकर पूरी खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे अन्य जीवों और मानव स्वास्थ्य पर भी खतरा पैदा होता है।
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गंगा में मछलियों की मौत पर जांच कमेटी गठित:तीन सदस्यीय कमेटी ने 7 जगह लिए गंगा जल के सैंपल, टेनरियों का पानी गिरते मिला