DDUs Dr. Nikhil Top 5% Global Researchers

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर यूनिवर्सिटी के फिजिक्स डिपार्टमेंट के असिस्टेंट प्रोफेसर और युवा वैज्ञानिक डॉ. निखिल कुमार ने इंटरनेशनल लेवल पर बड़ी कामयाबी हासिल की है।

.

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच ‘SciRank Global’ ने साल 2025 की दुनिया भर की रैंकिंग में उन्हें टॉप 5% इंडिपेंडेंट रिसर्चर्स में जगह दी है। यह सिलेक्शन पूरी तरह से उनके रिसर्च पेपर्स की क्वालिटी, उनके काम के असर और साइंस की दुनिया में उनके टोटल कॉन्ट्रीब्यूशन को देखकर किया गया है।

बड़े इंटरनेशनल जर्नल्स में छपे रिसर्च पेपर्स डॉ. निखिल कुमार के रिसर्च पेपर्स दुनिया की सबसे मानी हुई साइंस पत्रिकाओं जैसे Physical Review Letters (APS) और Nature Scientific Reports में छप चुके हैं।

इसके अलावा, साल 2026 में भी दुनिया की टॉप ‘Q1 कैटेगरी’ की पत्रिकाओं Materials Today Communications, Journal of Physics and Chemistry of Solids और Ceramics International में उनके तीन इम्पोर्टेंट रिसर्च पेपर्स पब्लिश हुए हैं। इसी बेहतरीन काम की वजह से उन्हें दुनिया भर में यह पहचान मिली है।

डॉ. निखिल कुमार का मेन रिसर्च एरिया सुपरकंडक्टिंग माइक्रो और नैनो SQUID टेक्नोलॉजी है।

डॉ. निखिल कुमार का मेन रिसर्च एरिया सुपरकंडक्टिंग माइक्रो और नैनो SQUID टेक्नोलॉजी है।

देश के बड़े संस्थानों से की है पढ़ाई संत कबीर नगर के मेहदावल से अपनी शुरुआती पढ़ाई पूरी करने के बाद, डॉ. निखिल ने देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों से हायर एजुकेशन और रिसर्च का काम किया है।

उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी, जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur), टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) संस्थानों से पढ़ाई की है।

सुपरकंडक्टिंग माइक्रो-नैनो SQUID टेक्नोलॉजी पर रिसर्च उनका मेन रिसर्च एरिया सुपरकंडक्टिंग माइक्रो और नैनो SQUID टेक्नोलॉजी है। यह एक ऐसा बेहद सेंसिटिव टूल (उपकरण) है जो बारीक से बारीक मैग्नेटिक फील्ड (चुंबकीय क्षेत्र) को भी नाप सकता है।

इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल क्वांटम टेक्नोलॉजी, मेडिकल डायग्नोसिस (बीमारियों की जांच), स्पिन्ट्रॉनिक्स और एडवांस नैनो-इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बनाने में बड़े पैमाने पर होता है।

आजकल वे हाई-टेम्परेचर सुपरकंडक्टर्स, फेरोमैग्नेटिक थिन फिल्म, फेराइट–पॉलिमर नैनोकॉम्पोजिट्स और ज्यादा बिजली बनाने वाले परोव्स्काइट सोलर सेल्स पर काम कर रहे हैं। उनका यह काम एनर्जी (ऊर्जा), इलेक्ट्रॉनिक्स और एडवांस मटेरियल साइंस जैसे जरूरी क्षेत्रों से जुड़ा है।

'SciRank Global' से मिला सर्टिफिकेट

‘SciRank Global’ से मिला सर्टिफिकेट

सरकार से मिले हैं 82 लाख रुपए डॉ. निखिल को भारत सरकार के साइंस एंड टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री की तरफ से मशहूर ‘DST इंस्पायर फैकल्टी फेलोशिप अवार्ड’ मिल चुका है। उन्हें अपने रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए अब तक चार अलग-अलग ग्रांट्स (अनुदान) के जरिए लगभग 82 लाख रुपये का फंड मिल चुका है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह रैंकिंग सिर्फ रिसर्च पेपर्स की गिनती देखकर नहीं दी जाती, बल्कि काम की क्वालिटी और दुनिया में उसके असर को देखकर दी जाती है। उम्मीद की जा रही है कि डॉ. निखिल आगे भी नैनो-साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में ऐसा काम करते रहेंगे, जिससे भारतीय विज्ञान का नाम पूरी दुनिया में रोशन होगा।

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *