गायत्री शक्तिपीठ में युवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला:भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ने का उद्देश्य


लखनऊ के गोमती नगर स्थित गायत्री शक्तिपीठ में युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। जून माह भर चलने वाली इस कार्यशाला में युवाओं और बच्चों को कर्मकांड, भाषण-संभाषण और डफली वादन जैसी विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों से जोड़ना है। कार्यशाला में भाग लेने वाले प्रशिक्षार्थी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को समझने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता, संवाद कौशल और सामाजिक दायित्वों के प्रति भी जागरूक हो रहे हैं। इस आयोजन को लेकर क्षेत्र के युवाओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक उत्कृष्ट संस्कृति पहुंचाना आवश्यक प्रशिक्षण दे रहीं एडवोकेट शिवांगी मिश्रा ने बताया कि परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने मनुष्य में देवत्व के विकास और धरती पर स्वर्ग के अवतरण का महान लक्ष्य निर्धारित किया था। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक सद्विचार, संस्कार और उत्कृष्ट संस्कृति पहुंचाना आवश्यक है। एडवोकेट मिश्रा ने आगे कहा कि वर्तमान समय में समाज को सकारात्मक दिशा देने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यदि युवा संस्कारित, प्रशिक्षित और जागरूक होंगे, तो वे समाज में परिवर्तन के प्रभावी वाहक बन सकते हैं। इसी सोच के साथ गायत्री शक्तिपीठ ने यह प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है। भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों को सीख रहे हैं कार्यशाला में वर्तमान में 10 से अधिक प्रशिक्षार्थी नियमित रूप से भाग ले रहे हैं। वे पूरी लगन और उत्साह के साथ भारतीय संस्कृति के विभिन्न आयामों को सीख रहे हैं। आयोजकों का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी मजबूती से जोड़ते हैं। यही कारण है कि यह कार्यशाला स्थानीय परिवारों और युवाओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

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