Mobile Addiction Stops Suicide, 2000 Years Bhogni In Pret Yoni: Acharya Indresh

आगरा6 घंटे पहले

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आगरा में बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा बल्केश्वर पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन मंगलवार को कथा व्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने कहा कि जीवन चुनौतियों से भरा है। इनसे भागने वाला या शॉर्टकट अपनाने वाला भगवान को प्रिय नहीं होता। चुनौतियों का सामना हिम्मत से करें। अगर आप गलत नहीं हैं तो चिंता न करें, प्रभु एक दिन सत्य उजागर करेंगे।

कथा व्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए

कथा व्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय श्रीमद् भागवत कथा सुनाते हुए

कथा की शुरुआत संकट हरेंगी, करेंगी भली वृषभान की लली’ भजन से हुई। आचार्य इंद्रेश ने नरसिंह अवतार और वामन अवतार का प्रसंग रोचक शैली में सुनाया। उन्होंने कहा कि भागवत जी भगवान की शब्दमय मूर्ति हैं। भागवत सुनने वालों को कोई फल नहीं मांगना चाहिए, क्योंकि यह स्वयं ही फल है। इससे यश-कीर्ति और धन की भूख खत्म हो जाती है।

आचार्य ने चिंता जताई कि आज बच्चों में मोबाइल का एडिक्शन है। इसके लिए माता-पिता दोषी हैं। बच्चों को तोता-मैना की कविता के बजाय हरि के गीत याद कराएं। जगन्नाथ चकानंद जैसे भजन बच्चों पर भक्ति का असर डालते हैं।

उन्होंने कहा कि आत्महत्या करने वालों को 2000 वर्ष तक प्रेत योनि भोगनी पड़ती है। प्रेत वह बनता है जिसे नरक में भी जगह नहीं मिलती। यह योनि बहुत कष्टदायक होती है। धर्म अपने कल्याण की कामना है, लेकिन सबके कल्याण की भावना परम धर्म है।

कथा में पधारे संत अरविंद जी महाराज ने कहा कि जब अधर पर मुस्कान और आंखों में आंसू आ जाएं तो समझिए श्रद्धा का चरमोत्कर्ष है। आगरा में ऐसे रसिक श्रोता हैं जो भजन पर तीन घंटे लगातार नृत्य कर सकते हैं। वृंदावन से भी कई संत-महंत पहुंचे।

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