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प्रतियोगी परीक्षाओं और नौकरी में लगातार असफलता युवाओं की मानसिक सेहत पर भारी पड़ रही है। परीक्षा परिणाम आने के कुछ समय बाद डिप्रेशन के मामले तेजी से सामने आ रहे हैं। मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में ऐसे युवाओं को उनके परिजन काउंसिलिंग के लिए लेकर पहुंच रहे हैं। हाल में आए तीन मामलों में यह बात सामने आई कि असफलता के बाद युवा खुद को समाज और परिवार से अलग कर एकांतवास में रहने लगे हैं। आइए आपको तीनों मामलों को बताते हैं। सीए में फेल हुआ तो बढ़ा डिप्रेशन पहले मामले में सीए की तैयारी कर रहा युवक लगातार दो साल से परीक्षा में असफल होने के बाद डिप्रेशन का शिकार हो गया। उसका दोस्त परीक्षा पास कर गया, जिसके बाद उसने उससे दोस्ती तक खत्म कर दी। युवक का मानना है कि तैयारी के दौरान उसे गलत दिशा में गाइड किया गया। बीते कई महीनों से वह अकेले कमरे में रह रहा है और पढ़ाई-लिखाई पूरी तरह छोड़ चुका है। कैंपस सिलेक्शन नहीं हुआ तो बातचीत की बंद दूसरे मामले में बीटेक के बाद कैंपस सिलेक्शन न होने से हताश युवक ने खुद को दुनिया से अलग कर लिया। परिवार वालों के मुताबिक वह किसी से बातचीत नहीं करता और ज्यादातर समय अकेले बिताता है। वहीं तीसरे मामले में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में असफल रहने के बाद युवक पूरे दिन सबसे अलग-थलग रहने लगा है। परिवार ने उसके व्यवहार में लगातार बदलाव देखने के बाद मनोविज्ञान केंद्र में संपर्क किया। जीवन में कई लक्ष्य रखें मंडलीय मनोवैज्ञानिक पूनम सिंह ने बताया कि तीनों युवाओं की काउंसिलिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि तीनों मामलों में एक बात समान मिली कि युवाओं ने अपने जीवन का केवल एक ही लक्ष्य तय कर रखा था। लक्ष्य पूरा न होने पर वे मानसिक दबाव में आ गए। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि बड़े लक्ष्य के साथ छोटे-छोटे लक्ष्यों पर भी फोकस करना चाहिए, ताकि असफलता का दबाव कम हो सके। बीते एक साल में इस तरह के कई मामले सामने आ चुके हैं।
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प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता दे रही डिप्रेशन:मंडलीय मनोविज्ञान केंद्र में आ रहे मामले, एकांतवास की ओर जा रहे युवा