रामपुर रज़ा पुस्तकालय में दुर्लभ पांडुलिपियों की प्रदर्शनी:अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस पर डॉ. पुष्कर मिश्र ने संरक्षण का संदेश दिया


अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस के अवसर पर रविवार को रामपुर रज़ा पुस्तकालय एवं संग्रहालय में दुर्लभ एवं ऐतिहासिक धरोहरों की विशेष प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। पुस्तकालय एवं संग्रहालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने दरबार हॉल में इसका उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी में पुस्तकालय में संरक्षित प्राचीन पांडुलिपियों, ऐतिहासिक चित्रों, दुर्लभ कलाकृतियों और सांस्कृतिक धरोहरों को प्रदर्शित किया गया। इन अमूल्य संग्रहों को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इस अवसर पर डॉ. पुष्कर मिश्र ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय दिवस हमारी सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बताया कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय केवल शोध और अध्ययन का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और कला की अमूल्य धरोहरों का संरक्षक भी है। निदेशक ने विशेष रूप से हज़रत अली के हाथों से लिखी गई कुरान की प्रति का उल्लेख किया, जिसे विश्व की सबसे दुर्लभ धरोहरों में से एक माना जाता है। उन्होंने बताया कि इसकी केवल दो प्रतियां पूरे विश्व में मौजूद हैं, जिनमें से एक रामपुर रज़ा पुस्तकालय में और दूसरी इराक में सुरक्षित है। यह पांडुलिपि ऊंट की खाल पर लिखी गई है। इसके अतिरिक्त, पुस्तकालय में फारसी भाषा में वाल्मीकि रामायण, मंगोलिया का इतिहास तथा पंचतंत्र जैसी कई अन्य ऐतिहासिक पांडुलिपियां भी सुरक्षित हैं। डॉ. मिश्र ने कहा कि संग्रहालय में रखी प्रत्येक वस्तु “लाइव स्टॉक” की तरह होती है, जिनमें हमारी संस्कृति और इतिहास जीवंत रूप में सुरक्षित रहता है। उन्होंने यह भी बताया कि हामिद मंज़िल और रंग महल को संग्रहालय के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है और इसके लिए सभी के सहयोग की आवश्यकता है।

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