बांदा में जमीन विवाद में मां-भाई की हत्या का आरोप:आरोपित स्टांप विक्रेता ने 2024 में बदल ली थी पहचान


बांदा के बबेरू कोतवाली क्षेत्र में हुए दोहरे हत्याकांड के आरोपित स्टांप विक्रेता राजकिशोर उर्फ गोविंद पर जमीन हड़पने के लालच में अपनी मां और भाई की हत्या का आरोप है। परिजनों का आरोप है कि आरोपित ने 2024 में अपने मतदाता पहचान पत्र में भी राजकिशोर के स्थान पर गोविंद नाम दर्ज कराकर अपनी पहचान बदल ली थी। मृतक शांती के पुत्र मातादीन ने बताया कि आरोपित राजकिशोर 13 साल की उम्र में लापता हो गया था। पांच साल बाद जब वह लौटा, तो परिवार उसे पहचान नहीं पाया। रिश्तेदारों की पंचायत के बाद पिता जगदीश ने उसे अपना बेटा मान लिया, लेकिन परिवार को उसकी हरकतों के कारण हमेशा उस पर राजकिशोर न होने का शक रहा। दोहरे हत्याकांड के बाद अब उन्हें पूरा यकीन है कि यह उनका लापता भाई नहीं है। मातादीन के अनुसार, आरोपित राजकिशोर ने तिंदवारी रोड मुहल्ले के एक मकान में हिस्सा पाया था। पखवाड़े भर पहले उसने मनोरथ थोक मुहल्ले के एक अन्य मकान पर ताला तोड़कर कब्जा कर लिया था। वह पिता की 30 बीघा जमीन में से आधा हिस्सा मांग रहा था, और बाद में 15 बीघे में से भी एक चौथाई हिस्सा लेने की बात कहने लगा। उसका दावा था कि 12 बीघा जमीन उसके गोद लेने वाले बाबा संता उर्फ सत्यनारायण की भी है, जिसके कारण वह अन्य भाइयों से अधिक हिस्सा चाहता था।
पिता जगदीश ने 2025 में हाई कोर्ट में मुकदमा दायर किया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आरोपित गोविंद उनका बेटा नहीं है और उसने जमीन हड़पने के लिए अपना नाम राजकिशोर के आगे गोविंद जोड़ लिया है। पिता जगदीश ने तत्कालीन डीएम जे. रीभा से भी चारों बेटों को बराबर जमीन देने का आग्रह किया था, लेकिन आरोपित पुत्र इसके लिए तैयार नहीं था। परिजनों की मांग पर पुलिस ने मां-बेटे के शवों का दो डॉक्टरों के पैनल द्वारा वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, दोनों के सीने में एक-एक गोली लगी थी, जो पीठ की ओर से बाहर निकल गई थी। एक्सरे जांच में दोनों के शरीर में छर्रे के रूप में लोहे के टुकड़े भी मिले हैं।

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