आर्मी भर्ती परीक्षा में हाईटेक साल्वर गैंग पकड़ा,:हरियाणा से संचालित, ब्लूटूथ-डिवाइस से करा रहा था नकल


मेरठ में सेना की 510 आर्मी बेस वर्कशॉप में ट्रेडमैन भर्ती परीक्षा के दौरान एक हाईटेक साल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क हरियाणा से संचालित हो रहा था, जहां बैठे मास्टरमाइंड इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए अभ्यर्थियों को लाइव निर्देश दे रहे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए, एसएसपी अविनाश पांडे ने जांच सीओ सौम्या अस्थाना को सौंपी है। पुलिस इस गैंग की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। हरियाणा, आगरा, हाथरस और मेरठ में फैले इस नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है। मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें हरियाणा भेजी गई हैं। जांच से खुलासा हुआ है कि यह गैंग बेरोजगार युवाओं को सेना में भर्ती कराने का झांसा देकर 12 से 15 लाख रुपये तक वसूलता था। नकल कराने के लिए ब्लूटूथ डिवाइस, माइक्रो ईयरफोन और फर्जी बायोमेट्रिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता था। सेना अधिकारियों को परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थियों की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। जांच करने पर कई परीक्षार्थियों के पास इलेक्ट्रॉनिक उपकरण पाए गए। कुछ अभ्यर्थी ब्लूटूथ के माध्यम से बाहर बैठे साल्वर से उत्तर सुन रहे थे, जबकि कुछ मोबाइल फोन का उपयोग करके ऑनलाइन प्रश्न हल कर रहे थे। पूछताछ में यह भी सामने आया कि गैंग के सदस्य अभ्यर्थियों के दस्तावेजों पर अन्य व्यक्तियों के बायोमेट्रिक का उपयोग कर सिस्टम को धोखा देने का प्रयास कर रहे थे। हालांकि, कंप्यूटर वेरिफिकेशन के दौरान यह फर्जीवाड़ा पकड़ में आ गया। सदर बाजार थाने में 19 अभ्यर्थियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, यह केवल नकल का मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित साइबर और प्रौद्योगिकी-आधारित भर्ती धोखाधड़ी का नेटवर्क है। जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगा रही हैं कि इस गैंग ने पहले किन-किन भर्ती परीक्षाओं को निशाना बनाया था। मेरठ पुलिस ने इस पूरे गैंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का मन बना लिया है। जल्द ही मुख्य आरोपियों सहित पूरे नेटवर्क को गिरफ्तार कर इस बड़े धोखाधड़ी का पर्दाफाश करने की तैयारी की जा रही है।

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